ओडिशा के बालासोर जिले के जंगलों से पांच बेबी ओरंगुटान बचाए गए हैं, जो भारत के मूल निवासी नहीं हैं। नंदनकानन चिड़ियाघर में उनका विशेष उपचार किया जा रहा है, जबकि पुलिस अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह की जांच कर रही है।

  • ओडिशा के बालासोर से 5 बेबी ओरंगुटान (3 नर, 2 मादा) बचाए गए।
  • नंदनकानन चिड़ियाघर में तापमान-नियंत्रित क्वारंटाइन और 24/7 निगरानी।
  • मैसूर चिड़ियाघर के सहयोग से विशेष डाइट चार्ट तैयार किया गया।
  • ओडिशा पुलिस की एसटीएफ अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट की जांच में जुटी।

भुवनेश्वर का नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क इन दिनों पांच विशेष मेहमानों की देखभाल में जुटा है। ओडिशा के बालासोर जिले के एक जंगल से पांच बेबी ओरंगुटान के बचाए जाने के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई है। चूंकि ओरंगुटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं, इसलिए इस घटना ने एक वैश्विक तस्करी सिंडिकेट की संलिप्तता की ओर इशारा किया है।

चिड़ियाघर के उप-निदेशक प्रदीप मिरासे के अनुसार, इन जानवरों (तीन नर और दो मादा) को तत्काल एक तापमान-नियंत्रित क्वारंटाइन केंद्र में स्थानांतरित किया गया। तीन अनुभवी कीपर्स और एक विशेष पशु चिकित्सा टीम उनकी चौबीसों घंटे देखभाल कर रही है। सीसीटीवी के जरिए उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। एक बेबी ओरंगुटान को बुखार होने के कारण उसका इलाज किया गया और अब सभी की स्थिति स्थिर है।

इन नन्हे मेहमानों के पोषण के लिए मैसूर चिड़ियाघर की मदद ली गई है, जिसे ओरंगुटान की देखभाल का व्यापक अनुभव है। उनके लिए एक सख्त डाइट चार्ट बनाया गया है, जिसके तहत हर दो घंटे में उन्हें भोजन दिया जा रहा है। छोटे बच्चों को मसले हुए आलू और सेब दिए जा रहे हैं, जबकि अन्य को केले, सेब और दूध दिया जा रहा है।

यह मामला महत्वपूर्ण क्यों है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारतीय जंगलों में गैर-देशी प्राइमेट्स का मिलना अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव अपराध का एक गंभीर संकेत है। ओरंगुटान मुख्य रूप से बोर्नियो और सुमात्रा (दक्षिण-पूर्व एशिया) में पाए जाते हैं। उनका ओडिशा में मिलना यह साबित करता है कि तस्कर अब भारत को एक ट्रांजिट पॉइंट या अवैध बाजार के रूप में उपयोग कर रहे हैं, जो वैश्विक जैव विविधता के लिए खतरा है।

इन प्राइमेट्स की बरामदगी एक संगठित लॉजिस्टिक्स चेन की ओर इशारा करती है, जो संवेदनशील जानवरों को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार ले जाने में सक्षम है।

इन सामाजिक जानवरों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए चिड़ियाघर ने खिलौने और स्लिंग्स (झूले) की व्यवस्था की है। प्रोटोकॉल के अनुसार, उन्हें 30 दिनों तक क्वारंटाइन में रखा जाएगा ताकि किसी भी संभावित बीमारी की जांच की जा सके। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये जानवर बोर्नियो से लाए गए हैं, जिसकी पुष्टि के लिए जल्द ही जेनेटिक विश्लेषण किया जा सकता है।

नंदनकानन चिड़ियाघर का ओरंगुटान से पुराना नाता रहा है। यहाँ बिन्नी नाम का एक ओरंगुटान था, जो 2003 में पुणे से लाया गया था और 2019 में 41 वर्ष की आयु में उसकी मृत्यु हो गई। बिन्नी उस समय भारत का एकमात्र ओरंगुटान था, जिसने इस चिड़ियाघर को इस प्रजाति की देखभाल में अनुभवी बनाया है।

क्या आप जानते हैं?: मनुष्यों और ओरंगुटान का डीएनए लगभग 97 प्रतिशत समान होता है, जो उन्हें हमारा सबसे करीबी रिश्तेदार बनाता है।
विशेषता जंगली ओरंगुटान चिड़ियाघर/संरक्षण में
औसत जीवनकाल 40 वर्ष तक 50 से 55 वर्ष
आहार जंगली फल और पत्तियां नियंत्रित डाइट चार्ट
सामाजिक व्यवहार अर्ध-एकाकी समूह आधारित

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: ये ओरंगुटान कहाँ से आए होंगे?
प्रारंभिक जांच के आधार पर अधिकारियों को संदेह है कि वे दक्षिण-पूर्व एशिया के बोर्नियो द्वीप से लाए गए हैं।

प्रश्न 2: क्या ये जानवर हमेशा के लिए नंदनकानन में रहेंगे?
इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। क्वारंटाइन अवधि के बाद केंद्रीय चिड़ियाघर अधिकारियों से अनुमति मांगी जाएगी।