प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली में मुलाकात करेंगे, जिसमें अंतिम S-400 यूनिट की डिलीवरी और अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस-NG मिसाइलों के विकास पर चर्चा होगी।

  • अंतिम S-400 ट्रायम्फ रेजिमेंट की डिलीवरी नवंबर 2026 तक सुनिश्चित।
  • ब्रह्मोस-NG पर ध्यान: तेजस और मिग-29 जेट के लिए हल्का और अधिक प्रभावी मिसाइल।
  • 'खरीदार-विक्रेता' संबंध से हटकर संयुक्त आरएंडडी और वैश्विक निर्यात की ओर कदम।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले, 11 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक उच्च-स्तरीय बैठक होगी। इस वार्ता का मुख्य केंद्र पांचवीं S-400 यूनिट की डिलीवरी में हुई देरी को दूर करना और अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के विकास को गति देना है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण S-400 की डिलीवरी में बाधा आई थी, लेकिन क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि की है कि रूस अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा। भारत ने 2018 में पांच रेजिमेंटों के लिए 5.43 बिलियन डॉलर का सौदा किया था, जिनमें से चार पहले ही तैनात हो चुकी हैं। ये प्रणालियां पंजाब, राजस्थान और जम्मू क्षेत्र में पाकिस्तान के खिलाफ और उत्तरी सीमा पर चीन की निगरानी के लिए तैनात हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत अपनी रक्षा खरीद रणनीति को बदल रहा है। हालांकि 2021-25 की अवधि में भारत के हथियारों के आयात में रूस की हिस्सेदारी 51% से घटकर 40% हो गई है, लेकिन संबंधों की गहराई बढ़ी है। अब भारत केवल खरीदार नहीं रहना चाहता, बल्कि संयुक्त अनुसंधान, सह-उत्पादन और फिलीपींस जैसे मित्र देशों को निर्यात करके एक ग्लोबल डिफेंस हब बनना चाहता है।

मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान रूसी प्रणालियों के प्रदर्शन ने उनकी विश्वसनीयता को साबित किया है। S-400 ने 300 किमी से अधिक की दूरी से एक पाकिस्तानी AEW&C विमान को मार गिराया, जो हवाई प्रभुत्व स्थापित करने में भारत की बड़ी जीत थी।

ब्रह्मोस-NG का विकास हवाई युद्ध में एक क्रांतिकारी बदलाव है, जिससे छोटे लड़ाकू विमान अब अधिक संख्या में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें ले जा सकेंगे, जिससे स्ट्राइक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

ब्रह्मोस-NG (नेक्स्ट जनरेशन) वजन में काफी हल्का है—यह 2.9 टन के बजाय केवल 1.3 टन का है। इसकी गति मैक 3.5 है और इसकी रेंज वर्तमान में 450 किमी है, जिसे बढ़ाकर 800 किमी करने की योजना है। इसे तेजस और मिग-29 जैसे विमानों से लॉन्च किया जा सकेगा, जिससे एक विमान अब 6 से 7 मिसाइलें ले जा सकेगा।

विशेषतामानक ब्रह्मोसब्रह्मोस-NG
वजन2.9 टन1.3 टन
गतिमैक 2.8-3.0मैक 3.5
प्लेटफॉर्मSu-30MKI (1 मिसाइल)तेजस/मिग-29 (6-7 मिसाइलें)
वर्तमान रेंज290-450 किमी450 किमी (लक्ष्य 800 किमी)
क्या आप जानते हैं?: S-400 ट्रायम्फ दुनिया की सबसे उन्नत लंबी दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों में से एक है, जो 600 किमी तक के लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतिम S-400 यूनिट की डिलीवरी कब होगी?
पांचवीं और अंतिम स्क्वाड्रन की डिलीवरी नवंबर 2026 तक होने की संभावना है।

ब्रह्मोस-NG वर्तमान संस्करण से कैसे अलग है?
यह वजन में हल्का है, अधिक तेज है और इसे तेजस जैसे छोटे लड़ाकू विमानों द्वारा बड़ी संख्या में ले जाया जा सकता है।