केरल उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि महात्मा गांधी विश्वविद्यालय के तहत कॉलेजों में सहायक प्रोफेसरों का अंतर-विश्वविद्यालय स्थानांतरण केवल उनकी लिखित सहमति से ही किया जा सकता है। अदालत ने बिना सहमति के किए गए एक स्थानांतरण आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है।
- अंतर-विश्वविद्यालय स्थानांतरण के लिए शिक्षक की लिखित सहमति अनिवार्य है।
- महात्मा गांधी विश्वविद्यालय अधिनियम, 1985 की धारा 68A इस नियम का आधार है।
- बिना सहमति के स्थानांतरण से शिक्षक की वरिष्ठता प्रभावित होती है, जो कानूनी रूप से गलत है।
कोच्चि में केरल उच्च न्यायालय ने शिक्षा क्षेत्र में प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायमूर्ति एन. नागेश ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया कि सहायक प्रोफेसरों का एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में स्थानांतरण मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता।
यह मामला संगीत एस. का है, जो देवस्वोम बोर्ड पंप कॉलेज, परुमला में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थीं। उन्हें बिना उनकी इच्छा के डीबी कॉलेज, सस्थमकोट्टा में स्थानांतरित कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि नियमों के अनुसार, अंतर-विश्वविद्यालय स्थानांतरण केवल उन्हीं शिक्षकों के लिए संभव है जिन्होंने तीन साल की सेवा पूरी कर ली हो और जिन्होंने स्वयं लिखित अनुरोध किया हो।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला शैक्षणिक स्वायत्तता और कर्मचारी अधिकारों की रक्षा करता है। अक्सर प्रशासनिक स्तर पर स्थानांतरणों का उपयोग दंडात्मक उपाय के रूप में किया जाता है। इस निर्णय से यह सुनिश्चित होगा कि शिक्षकों के करियर और व्यक्तिगत जीवन में स्थिरता बनी रहे और उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ विस्थापित न किया जाए।
"बिना सहमति के स्थानांतरण न केवल वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि यह शिक्षक की वरिष्ठता को भी खतरे में डालता है, जिससे उनके करियर की प्रगति बाधित होती है।"
न्यायालय ने विशेष रूप से महात्मा गांधी विश्वविद्यालय अधिनियम, 1985 की धारा 68A का उल्लेख किया। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने स्थानांतरण के लिए कोई अनुरोध नहीं किया था, जिससे यह आदेश पूरी तरह से अवैध हो गया। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि स्थानांतरण के बाद याचिकाकर्ता अपने नए कार्यस्थल पर सबसे कनिष्ठ (Junior) शिक्षक बन जातीं, जो उनके पेशेवर हितों के खिलाफ होता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या तीन साल की सेवा पूरी करना अनिवार्य है?
हाँ, नियमों के अनुसार अंतर-विश्वविद्यालय स्थानांतरण के लिए शिक्षक का कम से कम तीन साल की सेवा पूरी करना आवश्यक है।
प्रभावित शिक्षक उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सकते हैं, जैसा कि इस मामले में किया गया और अदालत ने आदेश को रद्द कर दिया।