आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सिंचाई क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसे वित्त मंत्री ने 'मौन क्रांति' करार दिया है। मुख्यमंत्री ने 36 प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को पूरा करने के लिए तीन साल की समयसीमा तय की है।

  • सिंचाई क्षेत्र में 'मौन क्रांति' के लिए सीएम नायडू को स्टैंडिंग ओवेशन मिला।
  • ड्रिप सिंचाई की लागत ₹16 से घटाकर ₹1.60 प्रति मीटर की गई।
  • 36 प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 3 साल की समयसीमा निर्धारित।
  • सुपर एल नीनो स्थितियों के बीच पेयजल और पशुधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को अमरावती में आयोजित 8वें जिला कलेक्टरों के सम्मेलन में सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के अपने प्रयासों के लिए मंत्रियों और जिला कलेक्टरों से स्टैंडिंग ओवेशन प्राप्त किया। राज्य के वित्त मंत्री पय्यावुला केशव ने इस क्षेत्र में हुए विकास को एक "मौन क्रांति" (Silent Revolution) के रूप में वर्णित किया।

वित्त मंत्री ने विस्तार से बताया कि मुख्यमंत्री ने हंद्री-नीवा परियोजना और पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल के माध्यम से पानी छोड़ने सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति देने के लिए दिन-रात काम किया है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री की ड्रिप सिंचाई पहल ने इसकी लागत को ₹16 से घटाकर मात्र ₹1.60 प्रति मीटर कर दिया है, जिससे रायलसीमा क्षेत्र में बागवानी के विस्तार में अभूतपूर्व मदद मिली है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the drastic reduction in drip irrigation costs is a game-changer for arid regions like Rayalaseema. By making technology affordable, the administration is shifting the agricultural paradigm from water-intensive crops to sustainable horticulture, which is crucial for long-term food security in the face of climate volatility.

"The strategic diversion of Godavari water to the Krishna delta via Pattiseema is a masterstroke in integrated water resource management during drought periods."

वर्तमान में, राज्य की जल स्थिति चिंताजनक है। अधिकारियों के अनुसार, जलाशयों में वर्तमान में 638 टीएमसी फीट पानी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,023 टीएमसी फीट था। वर्षा में 54% से अधिक की गिरावट आई है और भूजल स्तर औसतन तीन मीटर नीचे गिर गया है। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए, मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि सुपर एल नीनो की स्थितियों के बीच लोगों और पशुधन के लिए पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पानी का आवंटन पहले पेयजल, फिर चारे की खेती और ड्रिप सिंचाई के माध्यम से स्थायी बागवानी फसलों के संरक्षण के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि जल-सुरक्षित गोदावरी डेल्टा के बाहर धान की नई खेती की अनुमति नहीं दी जाएगी।

भविष्य की योजना पर बात करते हुए, श्री नायडू ने 36 प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को पूरा करने के लिए तीन साल की समयसीमा तय की है। इन परियोजनाओं का लक्ष्य 17 लाख एकड़ नया आयक्यूट (सिंचित क्षेत्र) बनाना और 33.4 लाख एकड़ को स्थिर करना है। उन्होंने कलेक्टरों से भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है।

विवरण पिछला वर्ष (समान अवधि) वर्तमान स्थिति
जलाशय जल स्तर 1,023 tmc ft 638 tmc ft
वर्षा स्तर सामान्य/उच्च 54% की गिरावट
ड्रिप सिंचाई लागत ₹16 प्रति मीटर ₹1.60 प्रति मीटर
क्या आप जानते हैं?: सुपर एल नीनो एक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर का सतही जल असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिससे भारत सहित कई क्षेत्रों में गंभीर सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है।

Frequently Asked Questions

1. मुख्यमंत्री ने किन परियोजनाओं पर जोर दिया है?
मुख्यमंत्री ने हंद्री-नीवा परियोजना और पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल जैसी प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं और 36 अन्य प्राथमिकता वाली परियोजनाओं पर जोर दिया है।

2. ड्रिप सिंचाई की लागत में कमी का क्या प्रभाव पड़ा?
लागत ₹16 से घटकर ₹1.60 प्रति मीटर होने से रायलसीमा क्षेत्र के किसानों के लिए आधुनिक सिंचाई सुलभ हुई है और बागवानी का विस्तार हुआ है।