सिक्किम हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल के फैसले को पलटते हुए एक मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'नो-फॉल्ट लायबिलिटी' के तहत परिवार मुआवजे का हकदार है, भले ही ड्राइवर की लापरवाही साबित न हुई हो।
- सिक्किम हाईकोर्ट ने ब्रेक फेल होने से हुई मौत के मामले में ₹5 लाख मुआवजे का आदेश दिया।
- कोर्ट ने 'नो-फॉल्ट लायबिलिटी' (No-Fault Liability) के सिद्धांत को लागू किया।
- बीमा कंपनियों द्वारा पॉलिसी की जटिल भाषा और अस्पष्ट शर्तों पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई।
- मुआवजा राशि पर 14 फरवरी 2023 से 7% वार्षिक ब्याज देने का निर्देश।
सिक्किम हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है। जस्टिस भास्कर राज प्रधान की पीठ ने मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल (MACT) के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें यह कहा गया था कि चूंकि दुर्घटना ब्रेक फेल होने के कारण हुई थी और लापरवाही साबित नहीं हुई, इसलिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता।
यह मामला 12 नवंबर 2019 का है, जब एक वाहन दुर्घटना में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। मृतक की पत्नी, बेटे और माता-पिता ने गंगटोक स्थित ट्रिब्यूनल में ₹19,07,560 के मुआवजे की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने इस दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हादसे में तेज ड्राइविंग या लापरवाही का कोई प्रमाण नहीं मिला। इसके बाद पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह फैसला भारत में 'नो-फॉल्ट लायबिलिटी' के कानूनी प्रावधानों को मजबूत करता है। अक्सर बीमा कंपनियां तकनीकी खामियों या ड्राइवर की गलती साबित न होने का सहारा लेकर भुगतान से बचती हैं। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि मानवीय जीवन का मूल्य तकनीकी बारीकियों से ऊपर है और बीमा कंपनियों को अपनी जिम्मेदारियों से भागने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने बीमा पॉलिसियों की जटिल शब्दावली पर कड़ी टिप्पणी की। जस्टिस प्रधान ने कहा कि ग्राहकों को ऐसी पॉलिसी मिलनी चाहिए जिसकी शर्तें सरल हों, न कि उन्हें कंपनी की वेबसाइट के दर्जनों पन्नों की भूलभुलैया में भटकना पड़े। कोर्ट ने IRDA के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कवरेज की सीमा स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए।
"बीमा पॉलिसी के नियमों और शर्तों को समझना हमेशा से एक कठिन काम रहा है; बीमा प्रमाणपत्र की भाषा स्पष्ट होनी चाहिए ताकि बीमित व्यक्ति को अपने अधिकारों की पूरी जानकारी हो।"
कोर्ट ने बीमा कंपनी के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि मृतक स्वयं हादसे का कारण था। अदालत ने माना कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 140 के तहत, मृत्यु के मामले में ₹5 लाख का मुआवजा देना न्यायसंगत है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'नो-फॉल्ट लायबिलिटी' क्या है?
यह एक कानूनी प्रावधान है जिसके तहत सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा दिया जाता है, भले ही यह साबित न हो कि दुर्घटना किसी की लापरवाही के कारण हुई थी।
प्रश्न 2: हाईकोर्ट ने बीमा कंपनियों को क्या निर्देश दिए?
कोर्ट ने निर्देश दिया कि बीमा पॉलिसी की शर्तें सरल और स्पष्ट होनी चाहिए ताकि आम आदमी उन्हें आसानी से समझ सके और अपने अधिकारों को जान सके।