केरल उच्च न्यायालय ने एडिफिस इंजीनियरिंग को मिले टेंडर को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और तकनीकी विशेषज्ञता को वित्तीय बोली से ऊपर प्राथमिकता दी गई है।
- केरल हाईकोर्ट ने चंदरकुंज आर्मी टावर्स के विध्वंस के लिए एडिफिस इंजीनियरिंग के टेंडर को बरकरार रखा।
- अदालत ने पी.के. यूनिक प्रोजेक्ट्स और श्री कुमारन डेमोलिशर्स द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया।
- निविदा प्रक्रिया में तकनीकी मूल्यांकन को 70% और वित्तीय बोली को 30% वेटेज दिया गया था।
- सुरक्षा कारणों से नियंत्रित विध्वंस (Controlled Demolition) को प्राथमिकता दी गई ताकि पास के मेट्रो वायाडक्ट को नुकसान न पहुंचे।
कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने व्याटिला स्थित चंदरकुंज आर्मी अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स के दो टावरों के विध्वंस के लिए जिला कलेक्टर समिति द्वारा अपनाई गई निविदा प्रक्रिया को वैध ठहराया है। इस हाउसिंग कॉम्प्लेक्स का विकास आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गनाइजेशन (AWHO) द्वारा किया गया था, जिसमें कुल 208 अपार्टमेंट शामिल हैं।
न्यायाधीश ए.ए. जियाद रहमान ने बुधवार को उन दो याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें एडिफिस इंजीनियरिंग को दिए गए अनुबंध को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं, जिनमें पी.के. यूनिक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और श्री कुमारन डेमोलिशर्स शामिल थे, का तर्क था कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी। पी.के. यूनिक प्रोजेक्ट्स ने आरोप लगाया कि वित्तीय बोली के बाद मानदंडों को बदला गया ताकि एडिफिस इंजीनियरिंग को लाभ पहुंचाया जा सके।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक सरकारी टेंडर का नहीं, बल्कि शहरी सुरक्षा का है। जब बात बहुमंजिला इमारतों के 'कंट्रोल्ड डेमोलिशन' की होती है, तो सबसे कम बोली लगाने वाले के बजाय सबसे अनुभवी कंपनी का चयन करना अनिवार्य हो जाता है। इस मामले में कोच्चि मेट्रो वायाडक्ट जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की निकटता ने जोखिम को और बढ़ा दिया था, जिससे तकनीकी विशेषज्ञता सर्वोपरि हो गई।
"शहरी क्षेत्रों में उच्च-जोखिम वाले विध्वंस कार्यों के लिए वित्तीय लागत की तुलना में तकनीकी ट्रैक रिकॉर्ड और सुरक्षा प्रोटोकॉल का महत्व कहीं अधिक होता है।"
जिला प्रशासन ने अदालत को स्पष्ट किया कि निविदा के मानदंड विशेषज्ञों की सिफारिशों पर आधारित थे। एडिफिस इंजीनियरिंग का चयन उनके पिछले अनुभव के कारण किया गया, जिसमें मराडू के होटल प्रेसिडेंट क्लैरियन, जैन कोरल कोव और नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावर्स जैसे जटिल प्रोजेक्ट्स शामिल थे।
अदालत ने पाया कि अभिव्यक्ति रुचि (EOI) और प्री-बिड मीटिंग के विवरण में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से वित्तीय नहीं थी। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि चंदरकुंज टावरों में गंभीर संरचनात्मक खामियां थीं, जो लोगों और संपत्ति के लिए बड़ा खतरा बन गई थीं, इसलिए इनका विध्वंस और पुनर्निर्माण आवश्यक है।
| मानदंड (Criteria) | वेटेज (Weightage) | उद्देश्य (Purpose) |
|---|---|---|
| तकनीकी मूल्यांकन | 70% | सुरक्षा और अनुभव सुनिश्चित करना |
| वित्तीय बोली | 30% | लागत प्रभावशीलता |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: चंदरकुंज टावरों को गिराने का निर्णय क्यों लिया गया?
उत्तर: इन टावरों में गंभीर संरचनात्मक समस्याएं पाई गई थीं, जिससे ये असुरक्षित हो गए थे और आसपास के लोगों के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।
प्रश्न 2: एडिफिस इंजीनियरिंग को क्यों चुना गया?
उत्तर: कंपनी के पास नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावर्स और मराडू की इमारतों जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के विध्वंस का व्यापक अनुभव था।