MPSC द्वारा ग्रुप सी प्रारंभिक परीक्षा को जनवरी तक टालने के बाद पुणे में हजारों अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस निर्णय ने 12 लाख से अधिक उम्मीदवारों के वित्तीय और व्यक्तिगत जीवन में अस्थिरता पैदा कर दी है।

  • MPSC ग्रुप सी प्रारंभिक परीक्षा 25 अक्टूबर से टलकर 3 जनवरी हो गई है।
  • 5,707 रिक्तियों के लिए आवेदन करने वाले 12 लाख से अधिक उम्मीदवार प्रभावित।
  • पुणे में प्रणालीगत सुधारों और जवाबदेही की मांग को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन।
  • अभ्यर्थियों पर वित्तीय दबाव और विवाह जैसे सामाजिक दबाव बढ़े।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। आयोग ने संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा 2026 को 25 अक्टूबर से बढ़ाकर 3 जनवरी कर दिया है। आयोग ने इस देरी के लिए विधानसभा के शीतकालीन सत्र, त्योहारों और राज्य सेवा मुख्य परीक्षा का हवाला दिया है।

लेकिन 12 लाख उम्मीदवारों के लिए, जिन्होंने सहायक मोटर वाहन निरीक्षक, तलाठी, और कर सहायक जैसे 5,707 पदों के लिए आवेदन किया था, यह केवल एक तारीख का बदलाव नहीं है। 26 वर्षीय अविनाश कणगने जैसे युवाओं के लिए, जिन्होंने अपने माता-पिता से इस परीक्षा के बाद नौकरी शुरू करने का वादा किया था, यह देरी उनके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगाती है। मुख्य परीक्षा, जो 27 दिसंबर को होनी थी, उसकी नई तारीख पर अब कोई स्पष्टता नहीं है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि बार-बार परीक्षाओं का स्थगित होना MPSC के प्रशासनिक नियोजन की विफलता को दर्शाता है। जहाँ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) अपने कैलेंडर का सख्ती से पालन करता है, वहीं MPSC की अनिश्चितता छात्रों पर गहरा मानसिक दबाव डालती है। इसका सबसे बुरा असर महिला उम्मीदवारों पर पड़ता है, जिन्हें एक निश्चित उम्र तक शादी करने का पारिवारिक दबाव झेलना पड़ता है, जिससे उनके करियर की संभावनाओं का समय कम हो जाता है।

"प्रतियोगी परीक्षाओं का बार-बार टलना योग्यता की परीक्षा को वित्तीय और मानसिक सहनशक्ति की परीक्षा में बदल देता है।"

आर्थिक संकट भी एक बड़ा कारण बनकर उभरा है। पुणे जैसे शहरों में रहने वाले छात्रों के लिए, जहाँ मासिक खर्च लगभग 10,000 रुपये है, परीक्षा में देरी का मतलब है 60,000 से 70,000 रुपये का अतिरिक्त बोझ। हालांकि कुछ छात्रों को सार्थी (SARTHI) छात्रवृत्ति मिल रही है, लेकिन बिना सहायता वाले कई छात्र मजबूरन अपने गाँवों को लौटने लगे हैं।

27 वर्षीय दीपक धनगर, जिन्होंने इस परीक्षा की तैयारी के लिए अपनी आईटी नौकरी छोड़ दी थी, ने बताया कि आय के बिना छह महीने और बैठना उनके लिए असंभव है। इसी आक्रोश के कारण 7 सितंबर को ओमकारेश्वर पुल से कलेक्टर कार्यालय तक एक विशाल विरोध मार्च निकाला गया, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की गई।

विशेषताMPSC (वर्तमान स्थिति)UPSC (मानक)
कैलेंडर का पालनबार-बार स्थगनसख्त पालन
पूर्वानुमेयताकम / अनिश्चितउच्च / निश्चित
उम्मीदवारों पर प्रभावउच्च वित्तीय और सामाजिक तनावव्यवस्थित तैयारी
क्या आप जानते हैं?: इन ग्रुप सी पदों के लिए औसत मासिक वेतन 40,000 से 50,000 रुपये के बीच है, जो इसे ग्रामीण युवाओं के लिए अत्यधिक आकर्षक बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: MPSC ने ग्रुप सी परीक्षा क्यों स्थगित की?
आयोग ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र, त्योहारों और राज्य सेवा मुख्य परीक्षा के कारण इसे स्थगित किया है।

प्रश्न 2: इस निर्णय से कितने उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं?
5,707 रिक्तियों के लिए आवेदन करने वाले 12 लाख से अधिक उम्मीदवार इससे प्रभावित हुए हैं।