कोयंबटूर नगर निगम परिषद की बैठक में वेलालोर डंप यार्ड में प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट का पार्षदों ने पुरजोर विरोध किया, जिसके बाद मेयर ने टेंडर प्रक्रिया रोकने का आश्वासन दिया है।
- वेलालोर डंप यार्ड में 1,200 टन कचरा प्रसंस्करण क्षमता वाले प्लांट का प्रस्ताव था।
- DMK और AIADMK पार्षदों ने प्रदूषण और बाहरी कचरे (तिरुप्पुर) के आयात पर आपत्ति जताई।
- मेयर के. रंगनायकी ने 30 सितंबर को होने वाली टेंडर प्रक्रिया को रोकने का आश्वासन दिया।
कोयंबटूर के विक्टोरिया टाउन हॉल में आयोजित नगर निगम परिषद की बैठक में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब वेलालोर डंप यार्ड में प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी (WtE) परियोजना पर चर्चा शुरू हुई। नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग द्वारा प्रस्तावित इस क्लस्टर सुविधा का उद्देश्य कोयंबटूर और तिरुप्पुर निगमों से प्रतिदिन 1,200 टन नगरपालिका ठोस कचरे का प्रसंस्करण करना था।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लगभग 50 एकड़ भूमि निर्धारित की गई थी, जिसमें 20 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने वाला एक संयंत्र, प्री-प्रोसेसिंग सुविधाएं और एक वैज्ञानिक लैंडफिल शामिल होना था। हालांकि, इस योजना को स्थानीय पार्षदों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, जिन्होंने इसे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बताया।
विवाद के मुख्य कारण
DMK पार्षद और पार्टी फ्लोर लीडर आर. कार्तिकेयन ने आरोप लगाया कि इस परियोजना के बारे में स्थानीय निवासियों से कोई चर्चा नहीं की गई। उन्होंने विशेष रूप से तिरुप्पुर शहर के कचरे को वेलालोर लाने का विरोध किया, क्योंकि क्षेत्र पहले से ही गंभीर प्रदूषण और कचरा प्रबंधन की समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पिछले observaciones का हवाला देते हुए भूजल और वायु प्रदूषण पर गहरी चिंता व्यक्त की और 'विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन' (Decentralised Waste Management) की मांग की।
वहीं, AIADMK पार्षद आर. प्रभाकरण ने परियोजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए, जबकि उत्तर क्षेत्र के अध्यक्ष वी. कथिरवेल ने मौजूदा कचरा संग्रहण प्रणाली की विफलता, वाहनों की कमी और ठेकेदारों की लापरवाही का मुद्दा उठाया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद शहरी बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। जब प्रशासन बड़े पैमाने पर केंद्रीकृत संयंत्रों (Centralized Plants) की ओर बढ़ता है, तो स्थानीय समुदायों में 'नॉट इन माय बैकयार्ड' (NIMBY) की भावना प्रबल हो जाती है, खासकर तब जब पिछला ट्रैक रिकॉर्ड खराब रहा हो।
"शहरी कचरा प्रबंधन केवल तकनीक के बारे में नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सहमति और पारिस्थितिक संतुलन के बीच सामंजस्य बिठाने की कला है।"
नगर निगम आयुक्त कट्टा रवि तेजा ने स्पष्ट किया कि नया प्लांट केवल ताजे कचरे का प्रसंस्करण करेगा और पुराने ढेर को नहीं बढ़ाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदूषण नियंत्रण के कड़े उपाय किए जाएंगे, गैसों को उपचारित किया जाएगा और फ्लाई ऐश (fly ash) से ईंटें बनाई जाएंगी। उन्होंने दावा किया कि संयंत्र CPCB और TNPCB के मानकों का पालन करेगा।
Frequently Asked Questions
1. वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट क्या है?
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें नगरपालिका के ठोस कचरे को जलाकर या अन्य रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से बिजली (ऊर्जा) में बदला जाता है।
2. पार्षदों ने इस प्रोजेक्ट का विरोध क्यों किया?
मुख्य कारणों में स्थानीय प्रदूषण में वृद्धि, भूजल दूषित होने का डर और तिरुप्पुर जैसे अन्य शहरों का कचरा वेलालोर लाने का विरोध शामिल है।