नागपुर का ऐतिहासिक मारबत उत्सव अपनी 145वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिसे इस बार नगर निगम ने ₹2 करोड़ के बजट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास के साथ एक नया आयाम दिया है।
- नागपुर नगर निगम (NMC) ने इस वर्ष उत्सव के लिए ₹2 करोड़ का बजट आवंटित किया।
- काली और पीली मारबत के पुतलों को शहर की गलियों में घुमाया गया और अंत में जला दिया गया।
- उत्सव में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जैकी श्रॉफ और सुभाष घई जैसी दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की।
महाराष्ट्र के नागपुर शहर में तन्हा पोला के अवसर पर मनाया जाने वाला मारबत उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बुराइयों और बीमारियों को शहर से बाहर निकालने का एक प्रतीकात्मक माध्यम है। 145 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा भोंसले राजवंश और ब्रिटिश शासन के दौर से गुज़रते हुए आज भी शहर की सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। इस वर्ष, नगर निगम ने इसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने के उद्देश्य से अभूतपूर्व वित्तीय सहायता प्रदान की है।
शुक्रवार को आयोजित भव्य जुलूस में 14 फीट ऊंची काली मारबत और 18-20 फीट ऊंची पीली मारबत के साथ-साथ 'बग्या' नामक छोटे पुतले भी शामिल थे। भीड़ द्वारा लगाए जा रहे नारे, "इडा पीडा घेउन जा ग मारबत" (सभी बुराइयों को अपने साथ ले जाओ) और "रोग राय घेउन जा ग मारबत" (सभी बीमारियों को ले जाओ), पूरे वातावरण को भक्ति और विश्वास से भर रहे थे। यह जुलूस लगभग 6.5 किलोमीटर लंबा था, जिसके बाद पुतलों को अलग-अलग स्थानों जैसे हरिहर मंदिर और नायक तालाब पर जलाया गया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the institutionalization of folk rituals by municipal bodies is a strategic move to blend heritage with urban branding. By allocating ₹2 crore, the NMC is not just funding a parade but is attempting to transform a community-led folk tradition into a structured cultural asset that can attract global attention and boost local tourism.
"मारबत उत्सव केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकजुटता और ऐतिहासिक प्रतिरोध का एक जीवंत दस्तावेज़ है।"
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उत्पत्ति
आईआईटी बॉम्बे के विद्वान राहुल जांभुलकर के अनुसार, इस उत्सव की उत्पत्ति के तीन मुख्य सिद्धांत हैं। पहला, यह किसानों की परंपरा से जुड़ा है जो कीटों और बुराइयों को दूर करने के लिए मिट्टी की गुड़ियों को जलाते थे। दूसरा, काली मारबत को भोंसले राजवंश की बाका बाई से जोड़ा जाता है, जो ब्रिटिश शासन के सामने उनके समर्पण के प्रति जनता के गुस्से का प्रतीक मानी जाती है। तीसरा सिद्धांत इसे ब्रिटिश काल के दौरान एक प्रतिरोध के रूप में देखता है, जहाँ तरहाने तेली समुदाय ने सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध के बावजूद लोगों को एकजुट करने के लिए इस माध्यम का उपयोग किया।
| विशेषता | काली मारबत | पीली मारबत |
|---|---|---|
| ऊंचाई | लगभग 14 फीट | 18-20 फीट |
| शुरुआत | 1881 | 1885 |
| आयोजक | काली मारबत उत्सव समिति | तरहाने तेली समुदाय |
इस उत्सव का एक अन्य पहलू महिलाओं की श्रद्धा है। पीली मारबत के आसपास एक छोटा मेला लगता है, जहाँ महिलाएँ अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए पुतले को अर्पण करती हैं। यह दर्शाता है कि समय के साथ यह उत्सव केवल 'बुराई के विनाश' तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें शुभता और आशीर्वाद की भावना भी जुड़ गई है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मारबत उत्सव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य शहर से बीमारियों, आपदाओं और सामाजिक बुराइयों को प्रतीकात्मक रूप से बाहर निकालना और उन्हें जलाकर नष्ट करना है।
प्रश्न 2: इस वर्ष इस उत्सव में क्या खास रहा?
उत्तर: इस वर्ष नगर निगम ने ₹2 करोड़ का बजट दिया और इसमें कई अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों और बॉलीवुड हस्तियों ने भाग लिया।