भारत कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में एक‑तीहाई हिस्सेदारी को घटाते हुए, BRICS देशों के साथ व्यापार को विविधित करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। यह पहल आर्थिक संतुलन और विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ली गई है।

  • कच्चे तेल और पेट्रोलियम आयात का वर्तमान में लगभग 33% हिस्सा है।
  • BRICS देशों के साथ व्यापार में पिछले पाँच वर्षों में 45% की वृद्धि हुई।
  • विनिर्माण क्षेत्र की चुनौतियों को दूर करना भारत की प्राथमिकता है।

भारत ने हाल ही में BRICS देशों के साथ व्यापार को विविधित करने की रणनीति को आधिकारिक तौर पर घोषित किया है। कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आयात‑आधारित निर्भरता को कम करके, देश अपनी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है।

आयात संरचना में बदलाव की आवश्यकता

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2023‑24 में भारत के कुल आयात में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का हिस्सा लगभग 33% रहा। यह अनुपात वैश्विक तेल कीमतों में उतार‑चढ़ाव के साथ आर्थिक अस्थिरता को बढ़ा रहा था।

BRICS के साथ व्यापार का ऐतिहासिक विकास

पिछले पाँच वर्षों में भारत‑BRICS व्यापार में 45% की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। 2018 में लगभग $70 बिलियन के व्यापार को 2023 में $102 बिलियन तक बढ़ाया गया, जिसमें मुख्य रूप से वस्तु‑से‑वस्तु (B2B) लेन‑देन शामिल हैं।

विनिर्माण चुनौतियों का सामना

विनिर्माण क्षेत्र में तकनीकी उन्नति, आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन और निवेश की कमी जैसी समस्याएँ अभी भी प्रमुख बाधाएँ हैं। इन चुनौतियों को हल करने के लिए भारत ने "Make in India" पहल को पुनर्जीवित किया है, जिससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिले।

नीति उपाय और नई पहलें

सरकार ने BRICS देशों के साथ मुद्रा‑स्वैप समझौतों, मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और संयुक्त निवेश मंचों की स्थापना की घोषणा की है। इन उपायों से न केवल तेल‑आधारित आयात घटेगा, बल्कि वस्तु‑से‑सेवा (services) क्षेत्र में भी नई संभावनाएँ खुलेंगी।

व्यापार घाटे पर संभावित प्रभाव

आयात संरचना में विविधता लाने से भारत का व्यापार घाटा घटने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल आयात में 10% की कमी आती है, तो अगले पाँच वर्षों में वार्षिक ट्रेड सर्बैलेंस में $15‑20 बिलियन की सुधार हो सकती है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that diversifying away from energy‑heavy imports not only shields India from volatile global oil prices but also aligns with its long‑term goal of becoming a manufacturing hub for the Global South.

"भारत को अपनी विनिर्माण बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना होगा, तभी वह BRICS के साथ संतुलित व्यापार कर सकेगा।"
क्या आप जानते हैं? 2022 में भारत‑BRICS व्यापार में चीन के साथ व्यापार का हिस्सा 28% तक पहुँच गया था, जो 2015 के 15% से दो गुना अधिक है।

Frequently Asked Questions

  • भारत के लिए BRICS के साथ व्यापार को विविधित करना क्यों महत्वपूर्ण है?
  • कच्चे तेल आयात को घटाने के लिए कौन‑से कदम उठाए जा रहे हैं?