बृहन्मुंबई नगर निगम ने लालबागचा राजा पंडाल से उत्पन्न गीले अपशिष्ट को बायोमेथेन प्लांट में भेजकर गणेश चतुर्थी के दौरान सिविक अस्पतालों को स्वच्छ बिजली प्रदान करने का कदम उठाया है।
- लालबागचा राजा पंडाल से 80 मीट्रिक टन भोजन अपशिष्ट को ऊर्जा में बदला जाएगा
- बायोमेथेन प्लांट से 7,700 यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली उत्पन्न होगी
- बिजली सिविक अस्पतालों में वार्ड, गलियारे आदि को प्रकाशित करेगी
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने 'प्रसाद टू एनर्जी' पहल के तहत लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल से उत्पन्न गीले अपशिष्ट को बायोमेथेन प्लांटों में भेजकर नगरपालिका अस्पतालों को बिजली प्रदान करने का निर्णय लिया है।
भोजन अपशिष्ट से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन
पंडाल से प्रतिदिन लगभग 8‑10 मीट्रिक टन भोजन और जैविक अपशिष्ट उत्पन्न होने की उम्मीद है, जो चार अस्पतालों (नायर, कस्तूरबा, जीटीबी और सायन) के बायोमेथेन प्लांटों में भेजा जाएगा। प्रत्येक प्लांट प्रतिदिन दो मीट्रिक टन अपशिष्ट प्रक्रिया कर सकता है।
उत्पन्न हुई बिजली का उपयोग वार्ड, गलियारे और अस्पताल के सामान्य क्षेत्रों में प्रकाश व्यवस्था के लिए किया जाएगा, जिससे पारंपरिक कचरा निपटान पर दबाव कम होगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that इस पहल से न केवल कचरा प्रबंधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को भी साकार किया जाएगा। यह मॉडल अन्य शहरों के लिए एक उदाहरण स्थापित करता है।
यह पहल सतत कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Frequently Asked Questions
- प्रसाद टू एनर्जी पहल क्या है?
- गणेश चतुर्थी के दौरान लालबागचा राजा पंडाल से कितना अपशिष्ट उत्पन्न होगा?