पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पहलगाम आतंकी हमले पर BRICS शिखर सम्मेलन द्वारा की गई निंदा का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर 'दोहरे मापदंडों' का आरोप लगाते हुए कहा कि आतंकवाद की निंदा चयनात्मक नहीं होनी चाहिए।

  • महबूबा मुफ्ती ने पहलगाम हमले पर BRICS की निंदा का समर्थन किया।
  • उन्होंने गाजा और ईरान में हो रहे संघर्षों पर भारत की चुप्पी पर सवाल उठाए।
  • मुफ्ती ने कहा कि नागरिक रक्त की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती और न्याय में दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने वाले वैश्विक नेताओं के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने इस मुद्दे पर भारत के नेतृत्व की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा किया है।

मुफ्ती ने कहा कि भारत को BRICS की अध्यक्षता करते हुए अधिक साहस और वास्तविक नेतृत्व दिखाना चाहिए था। उन्होंने तर्क दिया कि सामूहिक घोषणा में न केवल पहलगाम, बल्कि गाजा में हो रहे विनाश और ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाइयों को भी स्पष्ट रूप से संबोधित किया जाना चाहिए था।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, महबूबा मुफ्ती का यह बयान वैश्विक राजनीति में 'दोहरे मापदंडों' की बहस को फिर से जीवंत करता है। जब कोई देश वैश्विक मंचों का नेतृत्व करता है, तो उसकी नैतिकता उसकी निष्पक्षता से मापी जाती है। मुफ्ती का तर्क है कि यदि आतंकवाद और नागरिक हिंसा के खिलाफ कार्रवाई केवल चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की विश्वसनीयता कम हो जाती है।

"नागरिक रक्त की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती, और अंतरराष्ट्रीय न्याय में दोहरे मापदंड नहीं हो सकते।"

मुफ्ती ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद की निंदा चयनात्मक नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की कोई श्रेणी नहीं होनी चाहिए और न ही किसी की राष्ट्रीयता, धर्म या भू-राजनीतिक झुकाव के आधार पर न्याय में अंतर होना चाहिए। उन्होंने वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूत करने के लिए भारत को एक उदाहरण पेश करने का आह्वान किया।

उन्होंने गाजा के लिए मानवीय सहायता के BRICS आह्वान का स्वागत किया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि केवल मानवीय राहत हिंसा को रोकने का विकल्प नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जवाबदेही और हिंसा का अंत ही वास्तविक समाधान है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पहलगाम, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, समय-समय पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर चुका है। हालिया आतंकी हमले ने घाटी में शांति प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

क्या आप जानते हैं?: BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) दुनिया की लगभग 42% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Frequently Asked Questions

1. महबूबा मुफ्ती ने BRICS की आलोचना क्यों की?
मुफ्ती ने BRICS की आलोचना नहीं की, बल्कि उन्होंने भारत से अपेक्षा की कि वह गाजा और ईरान जैसे अन्य वैश्विक संघर्षों पर भी उतनी ही मजबूती से आवाज उठाए जितनी मजबूती से पहलगाम हमले पर उठाई गई।

2. 'चयनात्मक आक्रोश' (Selective Outrage) का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि दुनिया के कुछ हिस्सों में होने वाली हिंसा पर तो प्रतिक्रिया दी जाती है, लेकिन अन्य महत्वपूर्ण संघर्षों या मानवीय संकटों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।