जॉर्डन के पूर्व मंत्री समीर हबशनेह का तर्क है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच वर्तमान सैन्य गतिरोध पारंपरिक युद्ध पैटर्न से अलग है, जिससे स्पष्ट होता है कि कोई भी पक्ष निर्णायक जीत हासिल नहीं कर सकता।
- वर्तमान खाड़ी संघर्ष निर्णायक जीत या आपसी थकान के पारंपरिक पैटर्न का पालन नहीं करता है।
- वियतनाम, अफगानिस्तान और इराक में अमेरिकी इतिहास रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने में विफलता का पैटर्न दिखाता है।
- ईरान के भौगोलिक लाभ और सीमाओं की सुलभता आर्थिक नाकेबंदी को इराक की तुलना में कम प्रभावी बनाती है।
खाड़ी क्षेत्र में चल रहा सैन्य तनाव एक ऐसे चरण में प्रवेश कर गया है जो पारंपरिक भू-राजनीतिक तर्क को चुनौती देता है। विश्व युद्धों के विपरीत, जो स्पष्ट आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुए, या ईरान-इराक युद्ध के विपरीत, जो आपसी थकान के साथ समाप्त हुआ, संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच वर्तमान घर्षण एक पारंपरिक युद्ध के बजाय एक उच्च-दांव वाली 'मुर्गों की लड़ाई' (cockfight) जैसा दिखता है।
ऐतिहासिक रूप से, अमेरिका सैन्य प्रभुत्व को राजनीतिक जीत में बदलने में संघर्ष करता रहा है। साइगॉन और काबुल में अराजक निकासी से लेकर इराक पर आक्रमण तक—जिसने अनजाने में तेहरान के क्षेत्रीय प्रभाव को मजबूत किया—अमेरिकी पैटर्न सामरिक सफलता लेकिन रणनीतिक विफलता का रहा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने के हालिया संक्षिप्त प्रयासों का अचानक अंत हो गया, जिससे मूल उद्देश्य अधूरे रह गए जबकि दोनों पक्षों ने जीत का दावा किया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि 'हमले और जवाबी हमले' का वर्तमान चक्र समाधान की ओर नहीं, बल्कि एक अनिश्चित यथास्थिति की ओर ले जा रहा है। अमेरिकी और इजरायली क्षमताओं का ईरान को खत्म करने में विफल होना, और ईरान का आत्मसमर्पण करने से इनकार करना यह दर्शाता है कि पूर्ण जीत की कीमत सभी पक्षों के लिए बहुत अधिक है।
खाड़ी युद्ध 'कोई विजेता नहीं और कोई पराजित नहीं' के सिद्धांत पर नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति की लड़ाई के रूप में लड़ा जा रहा है जहाँ कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है।
विवाद का एक महत्वपूर्ण बिंदु आर्थिक प्रतिबंधों की प्रभावशीलता है। जबकि अमेरिकी प्रशासन ने 'विनाशकारी' प्रतिबंध लगाए हैं, इराक की नाकेबंदी से इसकी तुलना मौलिक रूप से गलत है। इराक के विपरीत, जो काफी हद तक अलग-थलग था, ईरान की सीमाएं पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक जैसे देशों के साथ विस्तृत हैं, जो पश्चिमी आर्थिक दबाव के प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक जीवन रेखाएं प्रदान करती हैं।
इसके अलावा, ईरान की लगभग 700 किलोमीटर लंबी तटरेखा और रणनीतिक गहराई उसे वह लचीलापन प्रदान करती है जो छोटे खाड़ी देशों के पास नहीं है। वास्तविकता यह है कि जब तक ईरान हर अमेरिकी हमले का जवाब देने की क्षमता रखता है, तब तक उसके आसन्न पतन की कहानी केवल एक भ्रम है।
| विशेषता | इराक नाकेबंदी (अतीत) | ईरान प्रतिबंध (वर्तमान) |
|---|---|---|
| सीमा पहुंच | अत्यधिक प्रतिबंधित | विस्तृत/खुली सीमाएं |
| क्षेत्रीय समर्थन | शत्रु पड़ोसी | रणनीतिक साझेदारी |
| परिणाम | आर्थिक पतन | लचीला अनुकूलन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: अमेरिका खाड़ी में निर्णायक जीत क्यों हासिल नहीं कर पा रहा है?
उत्तर: ईरान की रणनीतिक गहराई, विविध सीमा व्यापार और पूर्ण पैमाने पर कब्जे की उच्च राजनीतिक लागत के कारण।
प्रश्न: वर्तमान संघर्ष वियतनाम युद्ध से कैसे अलग है?
उत्तर: जबकि वियतनाम एक घिसाई का युद्ध (war of attrition) था, खाड़ी संघर्ष रुक-रुक कर होने वाले हाई-टेक हमलों और आर्थिक युद्ध द्वारा चिह्नित है।