उड़ुपी के विधायक यशपाल सुवर्णा ने पोर्ट्स और मत्स्य विभागों से मालपे मछली पकड़ने वाले बंदरगाह के उचित रखरखाव का आग्रह किया। उन्होंने बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा उपायों और नई राष्ट्रीय योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने की भी मांग की।
उड़ुपी के विधायक यशपाल सुवर्णा ने बुधवार को मालपे मछली पकड़ने वाले बंदरगाह की वर्तमान स्थिति की समीक्षा हेतु एक विशेष बैठक का संचालन किया। इस मंच पर पोर्ट्स विभाग और मत्स्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे, जहाँ विधायक ने कहा कि हजारों मछुआरों की आजीविका सीधे इस बंदरगाह पर निर्भर करती है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पृष्ठभूमि
मालपे, कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित, राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण मछली पकड़ने वाला केंद्र है। यहाँ के मछुआरे मुख्यतः छोटे पैमाने पर कार्य करते हैं और उनका अधिकांश आय स्रोत समुद्री मत्स्य उत्पादन पर आधारित है। पिछले कुछ वर्षों में बंदरगाह के बुनियादी ढाँचे में गिरावट, अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा उपायों की कमी ने मछुआरों के जीवन को अस्थिर कर दिया है।
वर्तमान मुद्दे
विधानसभा सदस्य ने बताया कि बंदरगाह के रखरखाव के लिए पहले जारी किया गया टेंडर अब समाप्त हो चुका है, परन्तु विभागों ने नया टेंडर नहीं बुलाया। इसके अतिरिक्त, सीसीटीवी कैमरे, पर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग और सफाई व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं को लागू नहीं किया गया है, जिससे मछुआरों में असंतोष बढ़ रहा है।
फिशरमेन एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि पोर्ट्स विभाग की जमीन को केवल मत्स्य गतिविधियों के लिए आरक्षित करने का निर्णय था, परन्तु अब वह निजी व्यक्तियों को बिना टेंडर प्रक्रिया के सौंपा जा रहा है, जो भविष्य में गंभीर कानूनी विवाद का कारण बन सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
सुवर्णा ने विभागीय अधिकारियों से तत्काल नई प्रवेश द्वार की डिजाइन को अंतिम रूप देने और मछली पकड़ने के मौसम से पहले निर्माण कार्य पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने हाईवे 169A के विस्तार कार्य के लिए पोर्ट्स विभाग की जमीन पर मौजूद इमारतों को हटाने की भी मांग की, ताकि मार्ग का विस्तार बिना किसी बाधा के हो सके।
फिशरमेन एसोसिएशन द्वारा प्रस्तावित बापुतोटा में निर्मित शौचालय की रखरखाव जिम्मेदारी स्थानीय सहकारी संस्था को सौंपने की भी सलाह दी गई, क्योंकि वर्तमान में यह सुविधा उपयोग में नहीं है।
आगे का रास्ता
विधानसभा सदस्य ने मछुआरों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दिशा में विभागीय सहयोग और पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया को सुदृढ़ करना आवश्यक है, ताकि समुद्री समुदाय की स्थिरता और आर्थिक विकास सुनिश्चित हो सके।
मालपे मछली पकड़ने वाले बंदरगाह की स्थिति न केवल स्थानीय मत्स्य उद्योग के लिए, बल्कि कर्नाटक की समुद्री अर्थव्यवस्था के लिए भी एक संकेतक है। यदि समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो मछुआरों की आजीविका संकट में पड़ सकती है, जिससे सामाजिक अस्थिरता का खतरा भी बढ़ेगा।