इलेक्ट्रॉसल रोल में नाम दर्ज कराने के लिए पहली बार वोटर फॉर्म‑6 अब माता‑पिता के पिछले SIR स्थिति का विवरण माँगता है, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • फॉर्म‑6 में अब माता‑पिता के पिछले SIR विवरण का घोषणा अनिवार्य
  • ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान यह चरण पूरा न करने पर आवेदन स्वीकार नहीं होगा
  • रोल की शुद्धता बढ़ाने और दस्तावेज़ीकरण की बोझ कम करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया

भारत में चुनावी सूची (इलेक्ट्रॉसल रोल) का अद्यतन नियमित रूप से किया जाता है, और इस प्रक्रिया को विशेष‑तीव्र पुनरावलोकन (Special Intensive Revision – SIR) कहा जाता है। अब चुनाव आयोग ने फॉर्म‑6, जो प्रथम‑बार, नई आयु वर्ग या हटाए गए मतदाताओं द्वारा उपयोग किया जाता है, में एक नया घोषणा खंड जोड़ा है। इस खंड में आवेदक को स्वयं या उनके माता‑पिता/दादा‑दादी का पिछले SIR में मौजूद होना बताना अनिवार्य किया गया है।

नया घोषणा खंड कैसे काम करता है

ऑनलाइन ECINET पोर्टल पर फॉर्म‑6 भरते समय, भाग J और K के बीच एक नया प्रश्न दिखाई देता है। यहाँ तीन विकल्प हैं: (i) स्वयं का नाम पिछले SIR रोल में था, (ii) माता‑पिता या दादा‑दादी का नाम था, या (iii) न तो स्वयं का न ही माता‑पिता का नाम था। यदि पहला या दूसरा विकल्प चुना जाता है, तो आवेदक को संबंधित विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और सीरियल नंबर का विवरण देना पड़ता है। तीसरा विकल्प चुनने पर भी आवेदन स्वीकार किया जाता है, पर पोर्टल इस विकल्प के परिणामों को स्पष्ट नहीं करता।

पिछले वर्ष की शुरुआत से लागू

यह घोषणा पहली बार बिहार में जून 2025 में शुरू हुए SIR में लागू हुई, और तब से वह राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश जहाँ SIR किया गया, वहाँ इसकी अनिवार्यता बढ़ा दी गई। आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि यह कदम दो प्रमुख लाभ देता है: एक तो यह मतदाता के डेटा को मौजूदा रोल से मैप करने में मदद करता है, और दूसरा यह दस्तावेज़ीकरण की जरूरत को घटाकर नई आवेदकों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाता है।

वर्तमान में SIR का राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव

वर्तमान में पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल, तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में SIR समाप्त हो चुका है, जबकि अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह जारी है। इस व्यापक पुनरावलोकन का उद्देश्य डुप्लिकेट, मृत, प्रवासित, अनुपस्थित या विदेशी मतदाताओं को सूची से हटाना है। नई घोषणा के साथ, भविष्य में ऐसे नाम हटाने की प्रक्रिया में संभावित विवादों को कम करने की उम्मीद है, क्योंकि अब पिछले SIR में परिवारिक इतिहास का रिकॉर्ड उपलब्ध होगा।

भविष्य की दिशा

हालाँकि अभी तक 1960 के पंजीकरण नियमों में औपचारिक संशोधन नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासनिक निर्देशों द्वारा यह परिवर्तन लागू किया गया है। यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग तकनीकी एवं नियामक बदलाव को तेज़ी से लागू करने के लिए तैयार है, जिससे लोकतंत्र की आधारशिला—सटीक और विश्वसनीय मतदाता सूची—को सुदृढ़ किया जा सके।