वृद्ध कपु नेता मुंद्रगड़ा पदमनभम् का निधन हुआ। उन्होंने आंध्र प्रदेश में कपु वर्ग के लिए बैकवार्ड क्लास दर्जा दिलाने की सबसे लंबी सामाजिक आंदोलन का नेतृत्व किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मुंद्रगड़ा पदमनभम् का निधन 73 वर्ष की आयु में हुआ।
  • कपू वर्ग को बैकवार्ड क्लास दर्जा दिलाने के लिये उन्होंने दशकों तक संघर्ष किया।
  • उनका राजनीतिक सफर कई पार्टियों, विधायक, सांसद और कैबिनेट मंत्री के पदों को शामिल करता है।

वृद्ध कपु नेता मुंद्रगड़ा पदमनभम् का 14 जुलाई 2026 को हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में दीर्घकालिक बीमारी के कारण निधन हो गया। उनका उम्र 73 वर्ष बताई गई है और उन्हें दो पुत्र और एक पुत्री ने उत्तराधिकारी बनाया। उनका निधन उनके मूल गाँव किरलम्पुड़ी (पूर्वी गोदावरी) में शोक की लहर दौड़ा दी।

प्रारंभिक जीवन और राजनीति में प्रवेश

पदमनभम् का जन्म 1953 में किरलम्पुड़ी गाँव में एक राजस्व अधिकारी (मुनसिफ) परिवार में हुआ। उनका राजनीतिक सफर अनायास ही शुरू हुआ जब दो‑बार के विधायक वीर राघव राव की मृत्यु के बाद उन्होंने अपने पिता के पद को संभाला। इस अचानक हुए प्रवेश ने उन्हें राजनीति की जटिल दुनिया में खींचा।

बहु‑पार्टी करियर और सरकारी सेवा

पदमनभम् ने 1980‑के दशक में जनता पार्टी से राजनैतिक यात्रा शुरू की, परंतु अभिनेता‑राजनीतिज्ञ एन.टी. रामराव द्वारा तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के गठन पर वे इस नई शक्ति में शामिल हो गए। उन्होंने 1983, 1985 और 1989 में प्रतिपड्डु से विधायक का पद संभाला और एन.टी.आर. के शासनकाल में कैबिनेट मंत्री भी रहे। 1995‑1999 में वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जुड़े, फिर 1999 में टीडीपी में लौट कर काकीनाड़ा से सांसद चुने गए, इसके बाद कांग्रेस में शामिल हुए।

कपू बैकवार्ड क्लास आंदोलन

पदमनभम् ने 2016 में कपू गर्जना का नेतृत्व किया, जो न. चंद्रबाबू नायडू की सरकार के खिलाफ 2014 के चुनावी वादे को न निभाने के विरोध में आयोजित किया गया। आंदोलनकारियों ने टुनी रेलवे स्टेशन के पास रत्नाचल एक्सप्रेस को आग लगा दी और राष्ट्रीय राजमार्ग‑16 को अवरुद्ध किया। इस घटना के बाद भारतीय रेलवे ने पदमनभम् के विरुद्ध मुकदमा दायर किया, जो अभी भी परीक्षण चरण में है। 2020 में उन्होंने कपु समुदाय को एक खुला पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने आंदोलन से बाहर निकलने का कारण बताया – सामाजिक मीडिया और टीवी पर अपने ही समुदाय द्वारा किए गए आक्रमण ने उन्हें चौंका दिया।

आख़िरी साल और विरासत

2024 में पदमनभम् ने फिर से यशवंत राजेन्द्र सिंह (वाईएसआरसीपी) के साथ जुड़ाव किया। उसी वर्ष उन्होंने कहा कि यदि जे.एस.पी के अध्यक्ष के.पावन कल्याण ने पिथापुरम सीट जीत ली तो वे अपने नाम में “रेड्डी” जोड़ देंगे। पावन कल्याण ने जीत हासिल की और 20 जून 2024 को पदमनभम् ने नाम बदलकर मुंद्रगड़ा पदमनभम् रेड्डी कर दिया। उनका निधन उनके गाँव में कपू नेताओं की भारी भीड़ को शोक में डुबो गया, जिन्होंने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका राजनीतिक सफर, सामाजिक संघर्ष और व्यक्तिगत बलिदान आज भी आंध्र प्रदेश की कास्ट‑आधारित राजनीति में गूँजते हैं।