दिल्ली में विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) की समय‑सारिणी में बदलाव किया गया है क्योंकि अब तक केवल 15% फॉर्म डिजिटल किए गए हैं। ड्राफ्ट वोटर रोल 17 अगस्त को जारी होगा, जबकि अंतिम रोल 19 अक्टूबर को प्रकाशित होगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- डिजिटाइजेशन दर केवल 15% तक सीमित
- भवन-से-भवन सर्वेक्षण 8 अगस्त तक बढ़ा
- ड्राफ्ट वोटर रोल 19 अक्टूबर को जारी
भारत के चुनाव आयोग ने 16 जुलाई को दिल्ली के विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) कार्यक्रम के लिए नई समय‑सारिणी घोषित की। तब तक केवल लगभग 15 प्रतिशत (21.75 लाख) फॉर्म डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए जा सके हैं, जबकि 1.45 करोड़ मतदाता में से 99 प्रतिशत ने फॉर्म प्राप्त कर लिया है। इस असंतुलन को देखते हुए, बूथ‑स्तर अधिकारी (BLO) द्वारा किए जा रहे घर‑दर‑घर सर्वेक्षण को 8 अगस्त तक बढ़ाया गया है, जबकि मूल रूप से 29 जुलाई को समाप्त होने वाला था।
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
विशेष तीव्र पुनरावलोकन का उद्देश्य मौजूदा ड्राफ्ट वोटर रोल में त्रुटियों को दूर करना और अधिकतम नागरिकों को सूची में शामिल करना है। दिल्ली में 1.45 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, जिससे यह प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी और जटिल बनती है। CEO दिल्ली के आंकड़ों के अनुसार, 99% मतदाताओं को फॉर्म वितरित किया गया, परंतु केवल 14.99% फॉर्म आज तक डिजिटल किए गए हैं। यह डिजिटल प्रगति का धीमा स्तर विशेषकर पुरानी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली और दक्षिण‑पूर्वी दिल्ली में 10% से कम है।
कारण और चुनौतियां
स्थानीय अधिकारी ने बताया कि कई मतदाता प्रक्रिया को समझने में समय ले रहे हैं, जबकि गलतियों को सुधारने में अतिरिक्त मेहनत लगती है। पश्चिम दिल्ली के एक BLO, नेहा रावत, ने बताया कि उन्हें रात देर तक काम करना पड़ता है, क्योंकि बच्चों को सोने के बाद ही वे सर्वेक्षण जारी रखती हैं। इसी तरह, निरेश, एक प्राथमिक स्कूल शिक्षक, ने कहा कि प्रत्येक फॉर्म को भरने में औसतन 10‑12 मिनट लगते हैं, जिससे कार्यभार बढ़ जाता है।
भविष्य की समय‑सारिणी और प्रभाव
ड्राफ्ट वोटर रोल अब 17 अगस्त को जारी होगा, जबकि पहले यह 5 अगस्त को प्रकाशित होना था। दावों और आपत्तियों की अवधि भी 5‑4 अगस्त से 17‑16 सितंबर तक विस्तारित की गई है। अंतिम रोल 19 अक्टूबर को प्रकाशित किया जाएगा, जो पहले तय 10 अक्टूबर से एक सप्ताह आगे है। अधिकारियों का मानना है कि विस्तारित समय‑सारिणी से कम से कम मतदाताओं को ड्राफ्ट रोल से बाहर रखा जाएगा और डिजिटल व सत्यापन प्रक्रिया में त्रुटियों की संख्या घटेगी।
यह बदलाव दिल्ली की आगामी विधानसभा और राष्ट्रीय चुनावों की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, क्योंकि सटीक वोटर सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वैधता को सुदृढ़ करती है।