भारत के चुनाव आयोग ने पंजाब, दो अन्य राज्यों और दिल्ली में चल रहे विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) के लिए नई तिथियां घोषित कीं। ड्राफ्ट सूची 13 अगस्त को और अंतिम सूची 12 अक्टूबर को प्रकाशित होगी, जबकि बीजेपी प्रमुख ने डेटा संग्रहण के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- पंजाब में मतदाता सूची SIR की नई समय‑सारणी
- ड्राफ्ट सूची 13 अगस्त, अंतिम सूची 12 अक्टूबर को जारी
- भ्रष्टाचार के आरोपों पर तत्काल जांच की मांग
भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रीढ़ के रूप में मतदाता सूची का अद्यतन, चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा नियमित रूप से किया जाता है। इस बार विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) के तीसरे चरण में पंजाब, दो अन्य राज्य और दिल्ली को शामिल किया गया है, जो मई 14 से शुरू हुआ था। इस चरण का उद्देश्य घर‑घर जाकर मतदाता विवरण की पुष्टि, मतदान केंद्रों की पुनः व्यवस्थितीकरण, और संभावित आपत्तियों का निपटारा करना है।
पृष्ठभूमि और महत्व
सिर कार्यक्रम में प्रत्येक बूथ स्तर अधिकारी (BLO) को 24,000 से अधिक कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है, जो 2.14 करोड़ के अधिकतम मतदाता वर्ग को कवर करता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से गलत प्रविष्टियों को समाप्त किया जाता है, जिससे आगामी चुनावों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ती है। पहले की समय‑सारणी में घर‑घर दौरा 24 जुलाई को समाप्त होना था, पर अब इसे 3 अगस्त तक बढ़ाया गया है।
नए समय‑सारणी का विवरण
ईसीआई ने पंजाब के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) को लिखित पत्र में बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची अब 31 जुलाई की बजाय 13 अगस्त को प्रकाशित होगी, जबकि अंतिम सूची 10 अक्टूबर के बजाय 12 अक्टूबर को जारी की जाएगी। इस परिवर्तन को सभी संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचित करने और सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया है। राजनीतिक दलों को भी लिखित रूप में नई तिथियों की जानकारी दी जाएगी।
भ्रष्टाचार के आरोप
पंजाब के भाजपा प्रमुख केवळ सिंह धिल्लों ने आरोप लगाया है कि कुछ आधिकारिक अधिकारी चुनाव‑संबंधी कार्यों के तहत राज्य के विभिन्न कल्याण योजनाओं का डेटा एकत्र कर रहे हैं, जिससे मतदाता सूची संशोधन का मूल उद्देश्य बिगड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ BLOs ने किरायेदार मतदाताओं से अनधिकृत दस्तावेज़, जैसे किरायेदारी अनुबंध या मकान मालिक के अफ़िडविट, की माँग की है, जो ईसीआई के दिशा‑निर्देशों में नहीं है। धिल्लों ने तत्काल जांच और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
आगे की सम्भावित प्रभाव
यदि इन आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ सकते हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया में भरोसे की कमी हो सकती है। ईसीआई की त्वरित कार्रवाई न केवल वर्तमान SIR को सुगम बनाएगी, बल्कि आगामी राष्ट्रीय और राज्य स्तर के चुनावों में भी सकारात्मक संकेत देगी। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि मतदाता सूची संशोधन निष्पक्ष, पारदर्शी और समय‑बद्ध तरीके से पूरा हो।