दिल्ली में हंगर स्ट्राइक पर मौजूद सक्रिय कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 17 दिनों में लगभग 9 किलोग्राम वजन घटाया। डॉक्टरों ने कहा कि वर्तमान में वह स्थिर है, लेकिन अगले कुछ दिनों में स्थिति बिगड़ सकती है। हाई कोर्ट में फोर्स‑फ़ीडिंग की मांग पर पिल दायर की गई है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- Sonam Wangchuk ने 17 दिनों में 9 किलो वजन घटाया
- डॉक्टरों ने स्थिति को स्थिर बताया पर आगे के दिनों में जोखिम बढ़ सकता है
- हंगर स्ट्राइक को रोकने हेतु फोर्स‑फ़ीडिंग पर हाई कोर्ट में पिल दायर
नई दिल्ली – कॉकरॉच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने पिछले 20 दिनों में 18 दिन तक केवल पानी व नमक के साथ हंगर स्ट्राइक की है। इस अवधि में उन्होंने लगभग 9 किलोग्राम वजन खो दिया, जिससे चिकित्सा समुदाय में गंभीर चिंता उत्पन्न हुई है।
चिकित्सीय निगरानी और वर्तमान स्थिति
रम मनोहर लोही अस्पताल की एक टीम, जिसमें डॉ. सतिश लांबा प्रमुख हैं, प्रतिदिन दो बार वांगचुक की जाँच करती है। रक्तचाप 110/70 mmHg, रक्त शर्करा 80 mg/dL और वजन आज लगभग 57.15 kg है। डॉक्टरों ने कहा कि वांगचुक की आयु 59 वर्ष होने के बावजूद कोई पूर्व‑जन्म रोग नहीं है, पर लगातार उपवास से उरिक एसिड का स्तर बढ़ रहा है, जिससे मांसपेशियों का क्षरण शुरू हो सकता है।
हंगर स्ट्राइक के शारीरिक प्रभाव
विच्छेद के शुरुआती चरण में शरीर कार्बोहाइड्रेट को ऊर्जा के रूप में उपयोग करता है, फिर वसा को जलाकर कीटोन बनाता है। वांगचुक की पेशाब में कीटोन की उपस्थिति एक चेतावनी संकेत है, क्योंकि यह मेटाबोलिक तनाव को दर्शाता है। यदि उपवास जारी रहा तो इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, किडनी क्षति और गंभीर मांसपेशी हानि जैसी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। डॉक्टरों ने इसे “इंधन टैंक खाली होने पर बाईक के रिज़र्व उपयोग” से तुलना की है।
कानूनी पहल और फोर्स‑फ़ीडिंग का मुद्दा
दिल्ली हाई कोर्ट में एक सार्वजनिक हित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें वांगचुक को तुरंत फोर्स‑फ़ीडिंग करने की मांग की गई है। याचिका के अनुसार, यदि दो दिन और वजन घटता रहा तो उनका जीवन जोखिम में पड़ सकता है। भारतीय चिकित्सीय मानदंड के अनुसार, जब तक रोगी स्थिर है और अपनी इच्छा व्यक्त कर सकता है, फोर्स‑फ़ीडिंग अनिवार्य नहीं की जा सकती। डॉक्टर लांबा ने बताया कि इंट्रावेनस डेक्सट्रोज़ व सैलाइन समाधान सबसे सुरक्षित विकल्प होगा, यदि अंततः हस्तक्षेप आवश्यक हो।
राजनीतिक और सामाजिक पहलू
वांगचुक का हंगर स्ट्राइक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के विरोध में है, जो कई छात्रों और शिक्षकों के बीच असंतोष का कारण बना हुआ है। इस संघर्ष ने न केवल स्वास्थ्य के प्रश्न उठाए हैं, बल्कि लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति, नागरिक अधिकार और सरकार की जवाबदेही को भी उजागर किया है।
वर्तमान में वांगचुक की स्थिति स्थिर है, पर डॉक्टरों की सतर्कता के कारण अगले कुछ दिनों में स्थिति बिगड़ने की संभावना बनी हुई है। यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य संकट है, बल्कि भारत के सामाजिक‑राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ भी है।