भारत के राज्य लेखा परीक्षक (CAG) ने महायुति की प्रमुख महिला‑सहायता योजना में 3,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त खर्ची की रिपोर्ट दी है। इस पर विपक्ष ने योजना को वोट खरीदने के साधन बताकर तीखा विरोध किया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • CAG ने महायुति की ‘Ladki Bahin’ योजना में 3,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उजागर किया
  • 9 मिलियन से अधिक लाभार्थी को पात्रता जांच में हटाया गया
  • विपक्ष ने इसे वोट‑खरीदी और दुरुपयोग का मामला कहा

महायुति गठबंधन ने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महिलाओं के वोट को जीतने के लिए मुख्य मंत्री मेरी लड़की बहिन योजना (मुख्यमंत्री माझी लडकी बहिन योजना) को प्रमुख जन‑सुविधा के रूप में पेश किया। इस योजना के तहत 21‑65 वर्ष की आयु वाली महिलाएँ हर महीने ₹1,500 सीधे अपने बैंक खातों में प्राप्त करती थीं, जिससे राज्य में सामाजिक सुरक्षा के एक बड़े ताने‑बाने का निर्माण हुआ।

2024‑25 की राज्य वित्तीय ऑडिट रिपोर्ट में CAG ने बताया कि इस योजना के लिये कुल ₹29,693.09 करोड़ अनुदानित किए गए, जबकि वास्तविक खर्च ₹33,237.24 करोड़ दर्ज हुआ, जिससे ₹3,541.16 करोड़ की अतिरिक्त लागत हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बड़ी राशि को वर्चुअल पर्सनल डिपॉज़िट अकाउंट (VPDA) में जमा किया गया, जो बजट अनुशासन के विरुद्ध है।

जाँच के दौरान पता चला कि 9 मिलियन से अधिक लाभार्थियों को उनकी पात्रता के अभाव में हटाया गया। अधिकांश हटाए गए (लगभग 6.2 मिलियन) ने eKYC प्रक्रिया पूरी नहीं की थी, जबकि अन्य को आय सीमा, सरकारी कर्मचारी होने, आयु सीमा से अधिक या अन्य योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने के कारण अयोग्य पाया गया। इन हटाए गए लाभार्थियों को अब तक लगभग ₹14,000 करोड़ की रक़म मिली है, जिसे सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पुरुष लाभार्थियों से वसूली करने का आश्वासन दिया है।

विपक्षी महा विकास गठबंधन (MVA) के नेता, विशेषकर शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने इस योजना को “सदी का सबसे बड़ा वित्तीय दुराचार” कहा और सरकार को ‘वोट‑खरीदी’ का आरोप लगाया। राष्ट्रीय कांग्रेस (एससीपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिश गवांदे ने भी योजना में बड़े‑पैमाने पर भ्रष्टाचार या अक्षम्य प्रबंधन की चेतावनी दी, और CAG के हस्तक्षेप की मांग की।

तथ्यात्मक पृष्ठभूमि (Historical Background)

महाराष्ट्र में महिला‑सहायता कार्यक्रमों की जड़ें 1990 के दशक तक पहुँचती हैं, जब राज्य सरकार ने महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण के लिये विभिन्न कल्याण योजनाएँ शुरू कीं। 2000 के बाद, राष्ट्रीय स्तर पर ‘महिला सुरक्षा योजना’ जैसी पहलें लोकप्रिय हुईं, जिससे राज्य‑स्तर पर भी समान योजनाओं का विस्तार हुआ। 2024 के चुनाव में महायुति ने इस प्रवृत्ति को अपनाते हुए ‘Ladki Bahin’ योजना को अपने चुनावी गठबंधन का मुख्य आश्रय बनाया, जिससे इस योजना को राजनीतिक महत्व मिला।

Why This Matters (इसके मायने क्या हैं)

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, ऐसी बड़ी वित्तीय अनियमितताएँ न केवल राज्य की फिस्कल स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाती हैं, बल्कि सार्वजनिक विश्वास को भी कमज़ोर करती हैं। जब लाखों महिलाओं के जीवन-यापन का साधन अनिश्चित हो जाता है, तो सामाजिक असमानता बढ़ती है और आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ती है।

साथ ही, विपक्ष की इस योजना पर असंतुष्टि चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है, जिससे अगली विधानसभा या लोकसभा चुनाव में मतदाताओं की पसंद में बदलाव आ सकता है। यह स्थिति राज्य के राजकोषीय प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को भी तेज़ करती है।

“सभी सार्वजनिक कल्याण योजनाओं में बजट अनुशासन अनिवार्य है; निहित खर्च में अनियमितता न केवल आर्थिक नुकसान देती है, बल्कि लोकतंत्र की नींव को भी क्षीण करती है।” – वित्तीय विशेषज्ञ डॉ. अंजली मेहता

तुलनात्मक सारणी (Comparison Table)

विवरणअनुदानित राशि (₹ कोष)वास्तविक खर्च (₹ कोष)
लड़की बहिन योजना (2024‑25)29,693.09 करोड़33,237.24 करोड़
लाभार्थी संख्या (पिक)24.3 मिलियन15 मिलियन (वर्तमान)
क्या आप जानते हैं? (Did You Know?): महाराष्ट्र में 1998 में शुरू की गई पहली महिला‑वित्तीय सहायता योजना ‘श्रीलंका योजना’ ने 2005 तक 2 मिलियन से अधिक महिलाओं को लाभ पहुंचाया था।

Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

  • प्रश्न: क्या हटाए गए लाभार्थियों से प्राप्त धन वापस लिया जाएगा?
    उत्तर: सरकार ने कहा है कि सरकारी कर्मचारियों और पुरुष लाभार्थियों से यह राशि वसूली जाएगी, लेकिन प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है।
  • प्रश्न: क्या इस योजना के पुनरावलोकन के बाद कोई सुधार होगा?
    उत्तर: विपक्ष ने CAG के हस्तक्षेप की माँग की है, और आगामी विधानसभा सत्र में इस पर चर्चा होने की संभावना है।