द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने कर्नाटक के साथ मेकेडातु जलाशय विवाद को सुलझाने के लिए एक विशेष न्यायाधिकरण बनाने की मांग की है। पार्टी ने कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे पर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- DMK ने मेकेडातु जलाशय निर्माण विवाद के समाधान के लिए केंद्र से न्यायाधिकरण (Tribunal) बनाने की मांग की है।
- पार्टी ने कर्नाटक सरकार पर कावेरी का उचित जल हिस्सा न छोड़ने का आरोप लगाया है।
- एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में सांसदों की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया।
- DMK ने कहा कि कर्नाटक के रुख के कारण मेट्टूर बांध के गेट खोलने में कठिनाई हो रही है, जिससे किसान प्रभावित हैं।
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने केंद्र सरकार से एक महत्वपूर्ण मांग की है। पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच मेकेडातु (Mekedatu) में प्रस्तावित संतुलन जलाशय (Balancing Reservoir) के निर्माण को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए एक विशेष न्यायाधिकरण का गठन करे।
कावेरी जल विवाद और किसानों का संकट
लंदन से वर्चुअल माध्यम से पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में आयोजित सांसदों की एक बैठक में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कर्नाटक सरकार कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले का पालन करने में विफल रही है और तमिलनाडु का निर्धारित जल हिस्सा नहीं छोड़ रही है। DMK ने चिंता व्यक्त की कि कर्नाटक के हठधर्मी रुख के कारण मेट्टूर बांध (Mettur Dam) के गेट समय पर नहीं खोले जा पा रहे हैं, जिससे राज्य के लाखों किसानों को भारी आर्थिक और कृषि संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
DMK का राजनीतिक रुख और ऐतिहासिक संदर्भ
पार्टी ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक DMK सत्ता में है, वह कर्नाटक को इस बांध के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने से रोकेगी। पार्टी ने यह भी रेखांकित किया कि एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में ही केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कर्नाटक के बांध निर्माण प्रस्ताव को खारिज करने में सफलता प्राप्त की थी। इसके अलावा, कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को वापस करना भी पार्टी की रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
संसदीय कार्यवाही में सक्रियता
बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया कि संसद के दोनों सदनों में DMK के सांसद तमिलनाडु के हितों और राज्य से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध रहेंगे। यह कदम राज्य की जल सुरक्षा और राजनीतिक संप्रभुता को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।