2026 के मॉनसून सत्र में लोक सभा ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का विधेयक पारित किया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। यह संशोधन केस बैकलॉग को घटाने और न्यायिक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।

मुख्य बिंदु

  • लोक सभा ने सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या 38 करने का बिल मंजूर किया
  • विधेयक बिना बहस के केवल 10 मिनट में पारित हुआ
  • उद्देश्य: केस बैकलॉग घटाना और न्यायिक कार्यक्षमता बढ़ाना

2026 के संसद मॉनसून सत्र के 11वें दिन, लोक सभा ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करने का विधेयक पारित किया। इस विधेयक में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित सभी चार अतिरिक्त पदों को सम्मिलित किया गया है।

विधेयक को केवल दस मिनट के भीतर बिना किसी विस्तृत बहस के मंजूरी मिल गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सभी पक्ष इस सुधार की आवश्यकता को स्वीकार कर रहे हैं। संसद के इस तेज़ कार्य ने न्यायिक प्रणाली में दीर्घकालिक बदलाव की संभावनाओं को उजागर किया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1992 में सुप्रीम कोर्ट के आकार को 34 तक सीमित करने वाला संशोधन लागू किया गया था, लेकिन बढ़ते केस लोड और न्यायिक देरी ने इस संख्या को पुनः विचार करने की मांग को तीव्र किया। पिछले दो दशकों में न्यायालय में औसत केस बैकलॉग 55% तक पहुँच गया था, जिससे न्यायिक सुधार की आवश्यकता स्पष्ट हो गई।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जजों की संख्या में यह वृद्धि भारत की न्यायिक प्रणाली को तेज़ और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से लंबी सुनवाई समयसीमा घटेगी और न्यायिक निर्णयों की गुणवत्ता में सुधार होगा।

"सुप्रीम कोर्ट की क्षमता बढ़ाना केवल संख्या नहीं, बल्कि न्याय तक पहुंच को तेज़ करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है," प्रमुख कानूनी विश्लेषक अजय सिंह ने कहा।
Did You Know?: भारत में सुप्रीम कोर्ट की जज संख्या 1950 के बाद से केवल दो बार बदली गई है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या इस विधेयक के लागू होने के बाद केस बैकलॉग तुरंत घटेगा?

उत्तर: यह एक दीर्घकालिक प्रक्रिया होगी, लेकिन अतिरिक्त जजों की नियुक्ति से केस निपटान की गति में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।

प्रश्न 2: इस विधेयक को पारित करने में कौन से दलों ने समर्थन दिया?

उत्तर: सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस कदम को समर्थन दिया, जबकि कुछ विपक्षी सदस्यों ने प्रक्रिया की तेज़ी पर प्रश्न उठाए।