लोकसभा ने 34 से 38 जजों तक की संख्या बढ़ाने वाला बिल बिना चर्चा के मंजूर किया, जबकि विपक्ष ने NEET पेपर लीक और राम मंदिर दान के गबन पर नारेबाजी की। विधेयक पारित होते ही सत्र आज के लिए समाप्त कर दिया गया।
मुख्य बातें
- लोकसभा ने 34 से 38 जजों तक की संख्या बढ़ाने वाला बिल बिना बहस के मंजूर किया।
- विरोधी दल ने NEET पेपर लीक और राम मंदिर दान के गबन पर नारेबाजी की।
- बिल पारित होते ही सत्र आज के लिए समाप्त कर दिया गया।
बिल का मुख्य बिंदु
संघ विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के संक्षिप्त परिचय के बाद, चेयर ने वैधानिक प्रस्ताव पर चर्चा का आह्वान किया, परंतु विरोधियों की नारेबाजी के कारण तुरंत मतदान कर बिल पारित किया गया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2023 में एक अधिसूचना के तहत सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई थी, जिसे बाद में संसद में विधायी रूप से स्थायी बनाने के लिए यह बिल पेश किया गया। इस प्रकार, विधायी प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए कई बार अधिसूचना का प्रयोग किया गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia का विश्लेषण दर्शाता है कि जजों की संख्या बढ़ाने से न्यायालय की कार्यभार को कम किया जा सकता है, परन्तु बिना बहस के पारित होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न उठाता है।
"संवैधानिक सुधारों को सार्वजनिक बहस के बिना लागू करना न्यायिक स्वतंत्रता को खतरे में डाल सकता है," कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ डॉ. सुधा शर्मा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या इस बिल से मौजूदा जजों की पदस्थापना पर असर पड़ेगा?
उत्तर: नहीं, यह केवल अतिरिक्त चार पदों की सृजन करता है, मौजूदा जजों की स्थिति अपरिवर्तित रहती है।
प्रश्न 2: क्या विरोधी दल इस बिल को चुनौती देगा?
उत्तर: विपक्ष ने वैधानिक प्रस्ताव को अस्वीकार किया है और भविष्य में न्यायिक समीक्षा की संभावना जताई है।