कर्नाटक विधानसभा में उस समय भारी हंगामा हुआ जब भाजपा और जेडी(एस) ने वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले में कथित संलिप्तता के कारण मंत्री बी. नागेंद्र को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की।

  • बीजेपी और जेडी(एस) ने मंत्री बी. नागेंद्र की बर्खास्तगी की मांग को लेकर कर्नाटक विधानसभा में कार्यवाही बाधित की।
  • यह विवाद महारषि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में करोड़ों रुपये के गबन के मामले से जुड़ा है।
  • मंत्री नागेंद्र, जिन्होंने 2024 में इस्तीफा दिया था, उन्हें 3 अगस्त को फिर से कैबिनेट में शामिल किया गया।

17 अगस्त को कर्नाटक विधानसभा की कार्यवाही उस समय ठप हो गई जब विपक्ष, विशेष रूप से बीजेपी और जेडी(एस) ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हंगामे का मुख्य कारण कैबिनेट में मंत्री बी. नागेंद्र की उपस्थिति थी, जिन पर कर्नाटक महारषि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में करोड़ों रुपये के घोटाले में शामिल होने का आरोप है।

जैसे ही स्पीकर जी.एस. पाटिल ने प्रश्नकाल शुरू किया, विपक्ष के नेता आर. अशोक और बीजेपी सदस्य वी. सुनील कुमार ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक "भ्रष्ट मंत्री" कैबिनेट में बैठा हो, तो वे प्रश्नकाल में कैसे भाग ले सकते हैं। श्री अशोक ने मांग की कि मुख्यमंत्री उन्हें तुरंत बर्खास्त करें, अन्यथा मानसून सत्र को चलने नहीं दिया जाएगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह टकराव केवल एक व्यक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि कर्नाटक में शासन और नैतिकता की बड़ी लड़ाई है। बी. नागेंद्र को डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट में फिर से शामिल करना, जबकि उन्होंने पहले सिद्धरामैया प्रशासन के दौरान इसी तरह के आरोपों के कारण इस्तीफा दिया था, सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी छवि पर सवाल खड़े करता है। बीजेपी इस विरोधाभास का उपयोग सरकार को घेरने के लिए कर रही है।

इस मामले का कानूनी इतिहास विपक्ष के दावों को और मजबूत करता है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जुलाई 2024 में वाल्मीकि कॉर्पोरेशन मामले के सिलसिले में श्री नागेंद्र को गिरफ्तार किया था। हालांकि अक्टूबर में उन्हें विशेष अदालत से जमानत मिल गई, लेकिन ED और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) दोनों ने अपनी चार्जशीट में उनका नाम शामिल किया है, जिसमें आदिवासी विकास के लिए निर्धारित धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का आरोप है।

सीबीआई और ईडी की चार्जशीट में नामित मंत्री की पुनर्नियुक्ति राज्य सरकार के लिए एक खतरनाक कानूनी और राजनीतिक मिसाल कायम करती है।

विपक्ष के हंगामे पर प्रतिक्रिया देते हुए, बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने इन मांगों को समय की बर्बादी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सदस्य अपनी पार्टी के आंतरिक मतभेदों को छिपाने के लिए यह मुद्दा उठा रहे हैं और उन्होंने स्पीकर को कोई पूर्व सूचना भी नहीं दी थी। बार-बार अपील के बावजूद विपक्ष नहीं माना, जिसके कारण स्पीकर को दोपहर 1 बजे सदन स्थगित करना पड़ा।

क्या आप जानते हैं?: महारषि वाल्मीकि कॉर्पोरेशन का गठन विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए किया गया था, जिससे इस फंड में कोई भी गबन सीधे तौर पर वंचित समुदायों के साथ विश्वासघात माना जाता है।
चरण मंत्री बी. नागेंद्र की समयरेखा
जून 2024 घोटाले के आरोपों के बाद सिद्धरामैया कैबिनेट से इस्तीफा दिया।
जुलाई 2024 प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए गए।
अक्टूबर 2024 बेंगलुरु की विशेष अदालत से जमानत मिली।
3 अगस्त, 2026 डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट में पुनः शामिल।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाला क्या है?
यह कर्नाटक महारषि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के तहत अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए आवंटित करोड़ों रुपये के गबन का मामला है।

2. बीजेपी बी. नागेंद्र की नियुक्ति का विरोध क्यों कर रही है?
बीजेपी का तर्क है कि जिस मंत्री का नाम सीबीआई और ईडी की चार्जशीट में हो और जिसने भ्रष्टाचार के कारण पहले इस्तीफा दिया हो, उसे वापस कैबिनेट में लाना अनैतिक है।