तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने मद्रास उच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर दावा किया है कि उन्होंने छह AIADMK विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने से पहले उनकी स्वेच्छा और प्रमाणिकता की जांच की थी।

  • स्पीकर जे.सी.डी. प्रभाकर ने मद्रास उच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर इस्तीफों की वैधता का बचाव किया।
  • छह AIADMK विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने से पहले 'सीमित जांच' (Limited Inquiry) का दावा।
  • मामला अब 1 सितंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

तमिलनाडु की राजनीति में मचे घमासान के बीच, विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष एक महत्वपूर्ण हलफनामा प्रस्तुत किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 26 मई 2026 से 29 जून 2026 के बीच छह AIADMK विधायकों के इस्तीफों को स्वीकार करने से पहले उन्होंने एक 'सीमित जांच' की थी। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था कि इस्तीफे पूरी तरह से स्वैच्छिक थे और किसी बाहरी दबाव का परिणाम नहीं थे।

यह कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई जब AIADMK व्हिप एग्री एस.एस. कृष्णमूर्ति ने चार रिट याचिकाएं दायर कर इन इस्तीफों की वैधता को चुनौती दी। चुनौती दिए गए इस्तीफों में अम्बासमुद्रम, पेरुंदुरै, मदुरंतगम, धारापुरम, विरलीमलई और करूर निर्वाचन क्षेत्रों के विधायक शामिल हैं। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस्तीफे की प्रक्रिया में उचित जांच का अभाव था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल कुछ विधायकों के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों और न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। यदि न्यायालय इसे गलत पाता है, तो यह राज्य की विधायी स्थिरता को प्रभावित कर सकता है और भविष्य के लिए एक कानूनी मिसाल कायम करेगा।

स्पीकर ने अदालत को बताया कि सभी छह विधायकों ने व्यक्तिगत रूप से और अपने हस्तलेख में इस्तीफे सौंपे थे। उन्होंने प्रत्येक विधायक से व्यक्तिगत रूप से पूछताछ की ताकि यह पुष्टि हो सके कि उनके निर्णय के पीछे कोई अनुचित प्रभाव या जबरदस्ती नहीं थी। प्रभाकर ने उल्लेख किया कि कुछ विधायक अपने समर्थकों के साथ आए थे, लेकिन उनके व्यवहार से दबाव का कोई संकेत नहीं मिला।

"संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा की गई प्रक्रियात्मक जांच की न्यायिक समीक्षा अक्सर इस बात पर निर्भर करती है कि क्या प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया गया था।"

अदालत में यह भी मुद्दा उठा कि स्पीकर ने शुरू में विधानसभा सचिव आर. शांति के माध्यम से जवाब दाखिल किया था, जिसे याचिकाकर्ता ने अदालत की अवहेलना के रूप में देखा। हालांकि, स्पीकर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए किया था और उनका न्यायालय के प्रति उच्चतम सम्मान है।

स्पीकर ने तर्क दिया कि उनकी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 190(3)(b) और तमिलनाडु विधानसभा नियमों के नियम 22 के अनुरूप थी। उन्होंने दावा किया कि इस्तीफों को स्वीकार करने की प्रक्रिया में कोई कानूनी या संवैधानिक त्रुटि नहीं थी।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 190 विधायकों की अयोग्यता और इस्तीफे से संबंधित नियमों को निर्धारित करता है, जो राज्य विधानसभाओं के कामकाज का आधार है।
विवरणयाचिकाकर्ता का दावास्पीकर का तर्क
जांच की प्रक्रियाजांच नहीं की गई/अपर्याप्त थीसीमित और व्यक्तिगत जांच की गई
इस्तीफे की प्रकृतिदबाव में दिए गए हो सकते हैंपूरी तरह स्वैच्छिक और हस्तलिखित
अदालती प्रक्रियाअदालत की अनदेखी की गईप्रशासनिक कारणों से सचिव के माध्यम से जवाब दिया

Frequently Asked Questions

1. यह मामला मद्रास उच्च न्यायालय में क्यों पहुँचा?
AIADMK व्हिप ने आरोप लगाया कि छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने की प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण थी, इसलिए इसे कानूनी चुनौती दी गई।

p>2. अगली सुनवाई कब है?
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले को 1 सितंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया है।