मणिपुर विधानसभा ने जनजातीय समूहों की मांगों को स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने और एक राज्य जनसंख्या आयोग (SPC) स्थापित करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है।

  • मणिपुर विधानसभा ने NRC लागू करने और राज्य जनसंख्या आयोग (SPC) बनाने का प्रस्ताव पारित किया।
  • जनजातीय संगठनों ने अवैध प्रवासियों के कारण स्वदेशी समुदायों के अस्तित्व पर संकट का मुद्दा उठाया।
  • विधानसभा में जनसंख्या वृद्धि के आंकड़ों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई, विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में।

मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा ने एक ऐतिहासिक और विवादास्पद निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने और एक राज्य जनसंख्या आयोग (SPC) की स्थापना करने के प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। यह निर्णय उन जनजातीय समूहों की मांगों के जवाब में आया है, जो राज्य में 'गैर-स्थानीय निवासियों' की बढ़ती संख्या से चिंतित हैं।

जनसांख्यिकीय परिवर्तन और चिंताएं

जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक खमुकचम जोयकिशन ने बजट सत्र के अंतिम दिन इन प्रस्तावों को सदन के सामने रखा। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 2001 से 2011 के बीच मणिपुर के पहाड़ी जिलों में जनसंख्या वृद्धि दर 250.90% तक पहुंच गई, जबकि घाटी वाले जिलों में यह 125.40% थी। जोयकिशन ने तर्क दिया कि पहाड़ी क्षेत्रों में यह असामान्य वृद्धि गैर-भारतीयों के बड़े पैमाने पर अवैध प्रवेश की ओर इशारा करती है, जिससे छोटे स्वदेशी समुदायों के विलुप्त होने का खतरा पैदा हो गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मणिपुर में यह कदम केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरा सामाजिक और राजनीतिक है। राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का केवल दसवां हिस्सा घाटी (इम्फाल और जिरीबाम) है, जहाँ गैर-जनजातीय मेइती समुदाय का वर्चस्व है, जबकि पहाड़ी क्षेत्र मुख्य रूप से अनुसूचित जनजातियों के हैं। जनसंख्या का यह असंतुलन राज्य की भविष्य की राजनीतिक और सामाजिक संरचना को पूरी तरह बदल सकता है।

जनजातीय समुदायों का मानना है कि बिना NRC के, राज्य की जनसांख्यिकीय पहचान को सुरक्षित रखना असंभव होगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, म्यांमार में 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से सीमा पार से कुकी-चिन समूह के लोगों के आने की घटनाएं बढ़ी हैं। जनजातीय संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि 'गैर-स्थानीय' आबादी के बढ़ते प्रभाव से स्वदेशी लोगों के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक अधिकार खतरे में हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और ILP की सीमाएं

मणिपुर सरकार ने पहले ही 'स्थानीय' लोगों की पहचान के लिए 1961 को आधार वर्ष के रूप में अनुमोदित किया है और इनर लाइन परमिट (ILP) को प्रभावी बनाया है। हालांकि, जनजातीय नेताओं का तर्क है कि ILP पर्याप्त नहीं है क्योंकि यह 'स्वदेशी निवासी' की स्पष्ट परिभाषा प्रदान नहीं करता है। उन्होंने 1950 में समाप्त की गई 'पास या परमिट प्रणाली' को याद किया, जो घुसपैठियों के प्रवेश को नियंत्रित करती थी।Did You Know?: असम पूर्वोत्तर का एकमात्र राज्य है जिसने NRC लागू किया है, लेकिन 2019 के ड्राफ्ट के बाद से यह प्रक्रिया अनिश्चितता में है।

Frequently Asked Questions

1. मणिपुर विधानसभा ने क्या निर्णय लिया है?
विधानसभा ने NRC लागू करने और राज्य जनसंख्या आयोग (SPC) बनाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया है।

2. जनजातीय समूह NRC की मांग क्यों कर रहे हैं?
उनका मानना है कि अवैध प्रवासियों (म्यांमार, बांग्लादेश, नेपाल से) के कारण राज्य की मूल जनसंख्या और संस्कृति खतरे में है।