आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी मतदाताओं को बड़े पैमाने पर सूची से बाहर कर दिया गया है।

  • AAP ने दावा किया कि बिहार और यूपी के प्रवासियों को जानबूझकर मतदाता सूची से हटाया जा रहा है।
  • लगभग 47 लाख मतदाता वर्तमान में निष्कासन के खतरे का सामना कर रहे हैं।
  • पार्टी ने चुनाव आयोग पर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और BLO की लापरवाही का आरोप लगाया।

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश से आए प्रवासी मतदाताओं को बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि यदि चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया की समीक्षा नहीं की, तो लाखों वैध नागरिक वोट देने के अधिकार से हाथ धो बैठेंगे।

बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दावा किया कि SIR प्रक्रिया के तहत हटाए गए अधिकांश वोट उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासियों के थे। उन्होंने कहा कि इन मतदाताओं को 'अनुपस्थित' (Absent) और 'स्थानांतरित' (Shifted) की श्रेणी में डाल दिया गया है, जिससे उनकी चुनावी भागीदारी खतरे में पड़ गई है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली की जनसांख्यिकी में प्रवासी श्रमिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं, तो यह न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है, बल्कि उन समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को भी कमजोर करता है जो शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सत्यापन प्रक्रिया समावेशी हो, न कि बहिष्कार करने वाली।

संजीव झा ने आगे कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों और झुग्गी-झोपड़ी (JJ clusters) वाले क्षेत्रों में पहचान से संबंधित कई समस्याएं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) ने अपना काम ठीक से नहीं किया और यह संदेह है कि चुनाव आयोग ने जानबूझकर उनके नाम सूची से हटा दिए हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ

भारत में मतदाता सूची का संशोधन एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) तब किया जाता है जब बड़े पैमाने पर डेटा शुद्धिकरण की आवश्यकता होती है। अक्सर, शहरी क्षेत्रों में प्रवासी आबादी के कारण 'अनुपस्थित या स्थानांतरित' (ASDD - Absent, Shifted, Dead, Duplicate) श्रेणी में नाम हटाना एक विवाद का विषय बन जाता है।

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47 लाख मतदाता निष्कासन के कगार पर हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने या तो अपने फॉर्म जमा नहीं किए या उन्हें ASDD श्रेणी में चिह्नित किया गया है।

विवरणआंकड़े/स्थिति
कुल मतदाता1.45 करोड़
जोखिम में मतदाता~47 लाख
मुख्य प्रभावित क्षेत्रअनधिकृत कॉलोनियां और झुग्गी क्लस्टर
प्रमुख प्रभावित राज्यबिहार और उत्तर प्रदेश

जो मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं, उनके पास 24 अगस्त से 23 सितंबर के बीच 'फॉर्म 6' भरकर अपना नाम वापस दर्ज कराने का अवसर होगा।

Frequently Asked Questions

1. मतदाता सूची से नाम हटाने का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?
पार्टी के अनुसार, मतदाताओं को 'अनुपस्थित' या 'स्थानांतरित' के रूप में गलत तरीके से चिह्नित किया जा रहा है।

2. बाहर किए गए मतदाता अपना नाम वापस कैसे जुड़वा सकते हैं?
वे 24 अगस्त से 23 सितंबर के बीच दावा और आपत्ति अवधि के दौरान 'फॉर्म 6' भर सकते हैं।

Did You Know?: दिल्ली की मतदाता सूची में प्रवासियों की संख्या शहर की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा बनाती है, जो चुनावों के परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।