कर्नाटक सरकार ने मैसूर विकास प्राधिकरण (MDA) की विवादास्पद 50:50 योजना के तहत आवंटित लगभग 1,100 वैकल्पिक साइटों के आवंटन को रद्द करने का आदेश दिया है। यह निर्णय एक उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद लिया गया है।
- MDA की 50:50 योजना के तहत 1,100 साइटों का आवंटन रद्द।
- रद्द किए गए भूखंडों की अनुमानित कीमत लगभग ₹2,000 करोड़ है।
- नियमों के उल्लंघन के कारण मार्च 2023 के बाद के आवंटन पर तत्काल प्रभाव से रोक।
- स्थानीय निकायों को खता (Khata) प्रक्रिया रोकने के निर्देश।
कर्नाटक सरकार ने मैसूर विकास प्राधिकरण (MDA) की विवादास्पद 50:50 वैकल्पिक साइट योजना के तहत किए गए बड़े पैमाने पर अनियमित आवंटन पर कड़ा प्रहार किया है। एक एकल-सदस्यीय जांच आयोग और उच्च स्तरीय तकनीकी समिति की सिफारिशों के आधार पर, राज्य सरकार ने लगभग 1,100 वैकल्पिक साइटों के आवंटन को रद्द करने का आदेश दिया है।
शहरी विकास मंत्री यथिंद्र सिद्धारमैया ने बुधवार को पुष्टि की कि इन रद्द किए गए भूखंडों का कुल मूल्य लगभग ₹2,000 करोड़ आंका गया है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से 14 मार्च, 2023 को जारी निर्देशों का उल्लंघन करने वाले आवंटनों को लक्षित करती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो आवंटन निर्धारित शर्तों के विरुद्ध किए गए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय न केवल प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग के खिलाफ एक कड़ा संदेश भी है। मैसूर में भूमि आवंटन का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है, विशेष रूप से जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के परिवार से जुड़े मामलों ने जांच का केंद्र बनाया था।
यह कार्रवाई शहरी विकास में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भू-माफियाओं के प्रभाव को कम करने के लिए अनिवार्य है।
सरकार ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि इन साइटों के लिए बिक्री विलेख (Sale Deeds) पहले ही पंजीकृत किए जा चुके हैं, तो उन्हें रद्द करने के लिए तुरंत दीवानी मुकदमे (Civil Suits) दायर किए जाएं। जिन मामलों में अभी तक पंजीकरण नहीं हुआ है, वहां MDA को तब तक बिक्री विलेख जारी करने से रोक दिया गया है जब तक कि सरकार नई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं करती।
इसके अतिरिक्त, मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन और अन्य स्थानीय निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे इन विवादित साइटों के लिए 'खता' (Khata) प्रक्रिया को तुरंत रोक दें। यदि खता पहले ही जारी किया जा चुका है, तो उन्हें कर्नाटक नगर निगम अधिनियम के तहत रद्द करने का आदेश दिया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मैसूर विकास प्राधिकरण (MDA) का विवाद तब गहरा गया जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी, पार्वती, को 14 साइटों के आवंटन में अनियमितताओं के आरोप लगे, जिनकी कीमत लगभग ₹56 करोड़ बताई गई थी। इस मामले में कर्नाटक लोकायुक्त द्वारा दायर 'बी' रिपोर्ट को बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने स्वीकार कर लिया था, जिससे इस पूरे घोटाले की नींव पड़ी।
Frequently Asked Questions
1. क्या सभी 1,100 साइटें रद्द कर दी गई हैं?
नहीं, सरकार इसे दो चरणों में कर रही है। पहले चरण में 14 मार्च 2023 के बाद के उल्लंघनकारी आवंटन शामिल हैं।
2. यदि साइट का पंजीकरण हो चुका है तो क्या होगा?
प्रशासन को बिक्री विलेख को रद्द करने के लिए दीवानी मुकदमे दायर करने का निर्देश दिया गया है।