कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के विकास को 'पारिस्थितिक मूर्खता' करार दिया है। उन्होंने हाल ही में डेटा सेंटर प्रस्ताव को वापस लेने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
- जयराम रमेश ने निकोबार में बुनियादी ढांचे के विकास को पारिस्थितिक रूप से विनाशकारी बताया।
- डेटा सेंटर के लिए जारी 'अभिरुचि की अभिव्यक्ति' (EoI) को प्रशासन ने रहस्यमयी ढंग से वापस ले लिया।
- ₹91,000 करोड़ की मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना का स्थानीय जनजातीय परिषदों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ग्रेट निकोबार में 'गंभीर पारिस्थितिक मूर्खता' का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रमेश ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार नए-नए बहाने बनाकर इस संवेदनशील द्वीप पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
विवाद का मुख्य केंद्र अंडमान और निकोबार द्वीप प्रशासन द्वारा हाल ही में जारी किया गया एक 'अभिरुचि की अभिव्यक्ति' (EoI) था। प्रशासन ने लिटिल अंडमान और ग्रेट निकोबार के पास एक विशाल 'ऊर्जा-खपत करने वाले' डेटा सेंटर के निर्माण के लिए व्यवहार्यता प्रस्ताव मांगे थे। हालांकि, केवल चार दिनों के भीतर, प्रशासन ने 'प्रशासनिक कारणों' का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को रहस्यमयी ढंग से वापस ले लिया।
विकास बनाम पर्यावरण का संघर्ष
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उम्मीद जताई कि डेटा सेंटर के प्रस्ताव को वापस लेना स्थायी होगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक परियोजना नहीं है, बल्कि एक व्यापक विनाशकारी योजना का हिस्सा है। ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना के तहत एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, हवाई अड्डा और विशाल पर्यटन परिसरों का निर्माण प्रस्तावित है, जिसके लिए पर्यावरणीय और वन मंजूरी को लेकर विवाद जारी है।
स्थानीय जनजातीय परिषदों (Tribal Councils) ने भी इस ₹91,000 करोड़ की मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना का पुरजोर विरोध किया है। जनजातीय समुदायों का कहना है कि उन्हें डेटा सेंटर जैसी किसी भी योजना के बारे में सूचित नहीं किया गया था, जो उनकी स्वायत्तता और जीवनशैली के लिए खतरा है।
निकोबार की पारिस्थितिकी और जनजातीय अधिकारों के साथ समझौता करना भविष्य के लिए एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।
BozokMedia विश्लेषण: क्या है असली मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह मामला केवल विकास का नहीं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और स्थानीय अधिकारों के बीच के टकराव का है। डेटा सेंटर जैसे उच्च ऊर्जा खपत वाले प्रोजेक्ट्स द्वीपों के नाजुक इकोसिस्टम पर अत्यधिक दबाव डाल सकते हैं। इसके अलावा, कोलकाता उच्च न्यायालय में भी इन मंजूरियों के खिलाफ मामले लंबित हैं, जो सरकार की स्थिति को कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कांग्रेस का मुख्य आरोप क्या है?
उत्तर: कांग्रेस का आरोप है कि सरकार निकोबार के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर रही है और विकास के नाम पर पर्यावरण की अनदेखी कर रही है।
प्रश्न 2: डेटा सेंटर प्रस्ताव को क्यों वापस लिया गया?
उत्तर: प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर 'प्रशासनिक कारणों' का हवाला दिया है, लेकिन विपक्ष इसे संदिग्ध मान रहा है।