तिरुनेलवेली के जिला कलेक्टर आनंद मोहन ने NCCF को चेतावनी दी है कि यदि किसानों का बकाया ₹3 करोड़ का भुगतान एक सप्ताह के भीतर नहीं किया गया, तो संस्था के खिलाफ कानूनी मामला दर्ज किया जाएगा।

  • NCCF पर किसानों का ₹3 करोड़ का भुगतान रोकने का आरोप।
  • कलेक्टर ने एक सप्ताह की समय सीमा निर्धारित की है।
  • भुगतान न होने पर NCCF के खिलाफ FIR दर्ज करने की चेतावनी।
  • भविष्य में जिले में NCCF की धान खरीद पर रोक लगाने की सिफारिश।

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में धान खरीद के भुगतान में देरी को लेकर तनाव बढ़ गया है। जिला कलेक्टर आनंद मोहन ने नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCCF) को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि किसानों का बकाया ₹3 करोड़ का भुगतान एक सप्ताह के भीतर नहीं किया गया, तो संस्था के अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित किसानों की शिकायत निवारण बैठक के दौरान यह मुद्दा गरमा गया। अम्बासमुद्रम किसान संघ के अध्यक्ष अरुणाचलम ने आरोप लगाया कि NCCF ने पांच महीने पहले धान खरीदा था, लेकिन भुगतान में अत्यधिक देरी की गई। हालांकि, जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ₹90 करोड़ में से ₹87 करोड़ का भुगतान कर दिया गया है, लेकिन शेष ₹3 करोड़ के लिए किसान अभी भी दर-दर भटक रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कृषि सहकारी संस्थाओं द्वारा भुगतान में देरी न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है, बल्कि सरकारी खरीद प्रणाली पर से उनका भरोसा भी कम करती है। यह मामला सहकारी संस्थाओं की जवाबदेही और जिला प्रशासन की किसानों के प्रति सुरक्षात्मक भूमिका को रेखांकित करता है।

"किसानों के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी; यदि वादा पूरा नहीं हुआ, तो NCCF के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी," - कलेक्टर आनंद मोहन।

बैठक के दौरान जब NCCF प्रतिनिधि ने फिर से वही पुराना आश्वासन दिया कि भुगतान एक सप्ताह में हो जाएगा, तो किसान भड़क उठे। उन्होंने कलेक्टर से मांग की कि संस्था के खिलाफ तुरंत मामला दर्ज किया जाए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले ही सरकार को पत्र लिखकर सिफारिश की है कि भविष्य में तिरुनेलवेली जिले में NCCF को धान खरीद की अनुमति न दी जाए।

इस विवाद के अलावा, किसानों ने जल प्रबंधन से जुड़ी अन्य समस्याओं को भी उठाया। किसान सेल्वकुमार ने तामिराबरणी-करुमैनियार-नामबियार नदी लिंक चैनल में घनी झाड़ियों की समस्या बताई, जिस पर कलेक्टर ने मानसून से पहले सफाई का आश्वासन दिया। साथ ही, पालमडई और कुप्पैकुरीची सिंचाई टैंकों की गाद निकालने की मांग भी की गई।

बैठक में देरी होने के कारण नाराज किसानों ने विरोध स्वरूप प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार पर धरना दिया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिकों की बैठक के कारण देरी हुई, लेकिन उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रशासन उनकी मांगों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Did You Know?: NCCF भारत में उपभोक्ता सहकारी समितियों की शीर्ष संस्था है, जिसका काम आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

Frequently Asked Questions

1. NCCF पर क्या आरोप हैं?
NCCF पर आरोप है कि उसने पांच महीने पहले खरीदी गई धान के ₹3 करोड़ का भुगतान किसानों को नहीं किया है।

2. कलेक्टर ने क्या सख्त कदम उठाने की बात कही है?
कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि भुगतान न होने पर कानूनी मामला दर्ज होगा और भविष्य में जिले में NCCF के कार्यों पर रोक लगाई जा सकती है।