कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने स्पष्ट किया है कि वाल्मीकि विकास निगम मामले में सीबीआई जांच लंबित होने के आधार पर बी. नागेंद्र को कैबिनेट में जगह देने से मना नहीं किया जा सकता। उन्होंने भाजपा पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया है।
- यू.टी. खादर ने कहा कि केवल सीबीआई जांच के आधार पर बी. नागेंद्र को मंत्री पद से वंचित नहीं किया जा सकता।
- खादर ने दावा किया कि एसआईटी जांच में नागेंद्र निर्दोष पाए गए थे और 90% राशि वापस कर दी गई है।
- भाजपा पर सदन की कार्यवाही में बाधा डालने और राजनीतिक द्वेष रखने का आरोप लगाया गया।
कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने शनिवार को मंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि विकास निगम से संबंधित धन के कथित दुरुपयोग के मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा की जा रही जांच के आधार पर बी. नागेंद्र को डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कैबिनेट में स्थान देने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
खादर ने तर्क दिया कि जैसे ही यह आरोप सामने आया था, नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आगे बताया कि एक विशेष जांच दल (SIT) ने दो साल तक इस मामले की जांच की और नागेंद्र को निर्दोष पाया। खादर के अनुसार, निगम को गबन की गई राशि का 90% से अधिक हिस्सा पहले ही वापस किया जा चुका है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा मोड़ है। एक तरफ जहां सीबीआई ने आरोप लगाया है कि नागेंद्र ने बेनामी वाहनों और अन्य माध्यमों से अवैध लाभ प्राप्त किया, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख रहा है। यह विवाद न केवल कानून के शासन बल्कि विधायी प्रक्रियाओं की गरिमा पर भी सवाल उठाता है।
केवल जांच लंबित होना किसी नेता को राजनीतिक रूप से अयोग्य घोषित करने के लिए पर्याप्त नहीं है, जब तक कि दोष सिद्ध न हो जाए।
सीबीआई की चार्जशीट में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जून 2026 की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जांच एजेंसी ने नागेंद्र, उनके सहयोगी नेक्कंती नागराज और वाल्मीकि निगम के प्रबंध निदेशक के बीच एक सुनियोजित साजिश का खुलासा किया है। सीबीआई का दावा है कि नागेंद्र को ₹1.20 करोड़ का अवैध लाभ मिला, जिसे उनके परिवार के सदस्यों और करीबियों के खातों में स्थानांतरित किया गया था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वाल्मीकि विकास निगम का मामला कर्नाटक में लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है। यह मामला जनजातीय कल्याण के लिए आवंटित धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसने राज्य की राजनीति में भ्रष्टाचार के विमर्श को तेज कर दिया है।
Frequently Asked Questions
1. यू.टी. खादर का मुख्य तर्क क्या है?
खादर का तर्क है कि जब भाजपा अन्य राज्यों में आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाती है, तो नागेंद्र के मामले में दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है?
2. सीबीआई ने नागेंद्र पर क्या आरोप लगाए हैं?
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि नागेंद्र ने वाल्मीकि निगम के धन का उपयोग करके बेनामी संपत्ति और वाहन खरीदे और अवैध रूप से ₹1.20 करोड़ प्राप्त किए।