हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2023 से 2025 के बीच मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के विदेशी दौरों पर 21.38 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने विधानसभा में इन खर्चों और उनके उद्देश्यों का विस्तृत विवरण पेश किया है।
- 2023 से जुलाई 2025 के बीच कुल ₹21.38 करोड़ का खर्च किया गया।
- शिक्षा क्षेत्र के तहत सिंगापुर और कंबोडिया के दौरों पर ₹11.91 करोड़ खर्च हुए।
- कई दौरों का खर्च ADB और केंद्र सरकार जैसे विकास निकायों द्वारा वहन किया गया।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी दी कि राज्य सरकार ने जनवरी 2023 से जुलाई 2025 के बीच विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के तहत विदेशी दौरों पर लगभग ₹21.38 करोड़ (₹21,38,09,284) खर्च किए हैं। यह जानकारी भाजपा विधायक राकेश जमवाल और रणधीर शर्मा द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में दी गई थी।
इस खर्च में मुख्यमंत्री सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, कैबिनेट मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान, जगत सिंह नेगी और चंदर कुमार सहित कई विधायकों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के दौरे शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि इनमें से कई दौरों का खर्च पूरी तरह या आंशिक रूप से केंद्र सरकार, एशियाई विकास बैंक (ADB) और नेशनल एग्रीकल्चरल हायर एजुकेशन प्रोजेक्ट (NAHEP) जैसे विकास निकायों द्वारा वहन किया गया था।
विभिन्न विभागों के प्रमुख दौरे
दौरों के विवरण के अनुसार, सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा क्षेत्र का रहा। समग्र शिक्षा STAR प्रोजेक्ट के तहत, 353 शिक्षकों और 50 छात्रों को सिंगापुर और कंबोडिया भेजा गया था। इस शैक्षिक एक्सपोजर विजिट पर कुल ₹11.91 करोड़ खर्च किए गए, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शिक्षा मानकों को समझना था।
पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिसंबर 2023 में दुबई का दौरा किया था ताकि पर्यटन क्षेत्र में निवेश आकर्षित किया जा सके, जिस पर ₹11.73 लाख खर्च हुए। वहीं, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के नेतृत्व में एक दल ऑस्ट्रिया के इनब्रुक गया था ताकि रोपवे तकनीक का अध्ययन किया जा सके। इस यात्रा ने माता चिंतपूर्णी यात्री रोपवे के लिए प्रमोटर खोजने में मदद की।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जहां एक ओर विपक्ष इन खर्चों को फिजूलखर्ची के रूप में देख रहा है, वहीं सरकार का तर्क है कि ये निवेश भविष्य के बुनियादी ढांचे, जैसे स्मार्ट सिटी, आधुनिक कृषि और उन्नत शिक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक हैं। इन दौरों का उद्देश्य हिमाचल को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालना है।
विदेशी दौरों पर होने वाला खर्च यदि सीधे तौर पर राज्य के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास में निवेश में तब्दील होता है, तो यह दीर्घकालिक लाभ दे सकता है।
कृषि और बागवानी क्षेत्र में भी सुधार के प्रयास किए गए। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी के नेतृत्व में अधिकारियों ने नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया। नीदरलैंड की यात्रा का उद्देश्य रोग मुक्त पौधों के उत्पादन को मजबूत करना था, जबकि ऑस्ट्रेलिया की यात्रा आधुनिक नर्सरी प्रबंधन पर केंद्रित थी। इन यात्राओं का एक बड़ा हिस्सा ADB द्वारा वित्तपोषित था।
शहरी विकास के क्षेत्र में, मंत्री विक्रम आदित्य सिंह ने स्पेन के बार्सिलोना का दौरा किया ताकि 'स्मार्ट सिटी' अवधारणा का अध्ययन किया जा सके। इसके अलावा, दक्षिण कोरिया और जापान के दौरे का उद्देश्य शहरी प्रबंधन के सर्वोत्तम अभ्यासों को सीखना था, जिस पर ₹72.67 लाख खर्च हुए।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: विदेशी दौरों पर कुल कितना खर्च हुआ?
उत्तर: जनवरी 2023 से जुलाई 2025 के बीच कुल ₹21,38,09,284 खर्च किए गए।
प्रश्न 2: क्या इन दौरों का खर्च पूरी तरह से राज्य के खजाने से आया?
उत्तर: नहीं, कई दौरों का खर्च ADB, केंद्र सरकार और अन्य अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसियों द्वारा वहन किया गया था।