राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देशानुसार, अमेरिकी डाक सेवा (USPS) ने मेल-इन बैलेट के उपयोग को सीमित करने के लिए एक नया 95-पृष्ठ का मसौदा तैयार किया है, जो चुनावी प्रक्रिया में बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है।

  • USPS ने मेल-इन बैलेट के लिए 95-पृष्ठ का नया प्रस्तावित नियम जारी किया है।
  • नियमों के तहत, उन राज्यों को बैलेट नहीं भेजे जाएंगे जो संघीय मतदाता रिकॉर्ड साझा नहीं करेंगे।
  • बैलेट लिफाफों पर बारकोड लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।
  • वर्तमान में अमेरिकी अदालत ने इन नियमों पर रोक लगा रखी है।

संयुक्त राज्य अमेरिका की डाक सेवा (USPS) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाली सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए, मेल-इन बैलेट (डाक द्वारा मतदान) के उपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए अपने प्रस्तावित नियमों का अंतिम मसौदा प्रकाशित किया है। यह कदम एक ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी अदालतों ने इन नियमों को लागू करने पर रोक लगा रखी है।

शुक्रवार को जारी किए गए इस 95-पृष्ठ के दस्तावेज़ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि अदालत का वर्तमान निषेधाज्ञा (injunction) उलट जाता है, तो ये नियम तुरंत प्रभावी हो सकें। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, USPS उन राज्यों को मेल-इन बैलेट वितरित नहीं करेगा जो संघीय मांगों के अनुसार मतदाता रिकॉर्ड साझा करने में विफल रहेंगे। इसके अतिरिक्त, राज्यों को मेल-इन बैलेट के अनुरोध करने वाले मतदाताओं की पहचान करनी होगी और लिफाफों को पुनर्गठित करना होगा ताकि उनमें बारकोड शामिल किए जा सकें, जिससे डाक सेवा सामग्री को ट्रैक कर सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल प्रशासनिक दक्षता के बारे में नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी संविधान के तहत चुनाव प्रशासन के अधिकार क्षेत्र को लेकर एक गहरा संघर्ष है। जहाँ संघीय सरकार इसे 'परिचालन दक्षता' कह रही है, वहीं आलोचकों का तर्क है कि यह राज्यों की शक्तियों का अतिक्रमण है।

यह कदम चुनावी प्रक्रिया में संघीय हस्तक्षेप को बढ़ाकर लोकतंत्र के ढांचे को चुनौती दे सकता है।

ऐतिहासिक रूप से, अमेरिका में चुनाव प्रबंधन का अधिकार राज्यों के पास होता है। जज इंदिरा तलवानी ने पहले ही इन नियमों को रोकते हुए कहा था कि संघीय सरकार बारकोडिंग जैसे नियम थोपकर राज्यों के अधिकार क्षेत्र में अनconstitutionally प्रवेश नहीं कर सकती। ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि ये परिवर्तन संघीय कानून के निष्ठावान निष्पादन के लिए आवश्यक हैं, लेकिन विपक्ष इसे मतदाताओं को डराने और चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश मान रहा है।

नवंबर में होने वाले आगामी चुनावों में अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का नियंत्रण दांव पर है। ऐसे में, डाक सेवा द्वारा इन नियमों को सार्वजनिक करना राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर रहा है। डेमोक्रेटिक सांसदों और नागरिक अधिकार संगठनों का कहना है कि यह मतदाताओं के अधिकारों का हनन है।

Did You Know?: अमेरिका में चुनावी धोखाधड़ी के मामले अत्यंत दुर्लभ हैं और प्रत्येक राज्य के पास गैर-नागरिकों के मतदान को रोकने के लिए सख्त कानून हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या ये नए नियम वर्तमान में लागू हैं?
उत्तर: नहीं, वर्तमान में अमेरिकी अदालत ने इन नियमों के लागू होने पर रोक लगा रखी है।

प्रश्न 2: ट्रम्प प्रशासन इन नियमों का बचाव क्यों कर रहा है?
उत्तर: प्रशासन का दावा है कि इससे डाक सेवा की दक्षता बढ़ेगी और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।