भारत के शिक्षित युवाओं का एक बड़ा हिस्सा 'प्रिकेरियट' वर्ग में गिर रहा है—जहां न स्थायी रोजगार है, न शिक्षा और न ही प्रशिक्षण। यह प्रणालीगत विफलता जनसांख्यिकीय लाभांश के लिए खतरा है और एक नया राजनीतिक तनाव पैदा कर रही है।

  • 15-30 वर्ष की आयु के हर 3 भारतीय युवाओं में से 1 'NEET' (न शिक्षा, न रोजगार, न प्रशिक्षण) श्रेणी में है।
  • 'प्रिकेरियट' का उदय—एक ऐसा वर्ग जो अस्थिर, अनुबंध-आधारित और गिग-वर्क पर निर्भर है—जाति और वर्ग की सीमाओं को तोड़ रहा है।
  • शिक्षा की बढ़ती लागत और स्थिर वास्तविक मजदूरी मध्यम वर्ग को असुरक्षा की ओर धकेल रही है।

भारत वर्तमान में अपने सामाजिक ढांचे में एक गहरे बदलाव का गवाह बन रहा है। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी सहित विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के नेता 'जेन जेड' (Gen Z) को लुभाने के लिए अपनी भाषा बदल रहे हैं, लेकिन अंतर्निहित संकट केवल एक पीढ़ीगत अंतर नहीं है। उन युवाओं की विशाल आबादी का उदय, जो न तो शिक्षा, न रोजगार और न ही प्रशिक्षण (NEET) में हैं, देश की विकास गाथा में एक गंभीर दरार को दर्शाता है।

शिक्षित युवाओं के लिए भविष्य का परिदृश्य अब डरावना होता जा रहा है। जिसे 'काम का भविष्य' कहकर बेचा जा रहा है, वह वास्तव में कठोर अनुबंधों और पार्ट-टाइम काम का एक जाल है। यह 'गिग इकोनॉमी' अक्सर नौकरी की असुरक्षा का मुखौटा है, जहां श्रमिकों को तकनीक के कारण अपनी प्रासंगिकता खोने का डर रहता है और उनके पास कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं होती।

'प्रिकेरियट' (Precariat) का उदय

सक्रिय विद्वान गाय स्टैंडिंग के सिद्धांतों के आधार पर, भारत में 'प्रिकेरियट' का उदय हो रहा है—एक ऐसा सामाजिक वर्ग जो लचीले श्रम, शून्य अनुबंध और अनौपचारिक रोजगार द्वारा परिभाषित है। यह केवल वंचितों तक सीमित नहीं है; भारतीय मध्यम वर्ग भी देख रहा है कि उनके बच्चे इस श्रेणी में गिर रहे हैं। सामाजिक स्तर पर नीचे गिरने के इसी डर ने भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं को विकास के अवसर के बजाय एक हताशापूर्ण उद्यम बना दिया है।

स्थिर करियर से अस्थिर अस्तित्व की ओर यह संक्रमण युवाओं की व्यक्तिगत विफलता नहीं, बल्कि आर्थिक ढांचे की प्रणालीगत विफलता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि NEET संकट केवल एक रोजगार आंकड़ा नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक टाइम बम है। जब युवाओं के एक बड़े हिस्से को लगता है कि कड़ी मेहनत अब सम्मानजनक जीवन की गारंटी नहीं देती, तो उनके मन में व्यवस्था के प्रति गहरा संदेह पैदा होता है। यह चीन के 'टैंग पिंग' (Tang Ping - लेटे रहना) और अमेरिका के 'ग्रेट रेजिग्नेशन' जैसा ही है, जहां श्रमिक शोषणकारी प्रणालियों को नकार रहे हैं। भारत में, यह आक्रोश एक शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति बन सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और मानव विकास संस्थान के अनुसार, देश में कम से कम 10.3 करोड़ युवा NEET श्रेणी में आते हैं। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नोट किया है कि शिक्षा और स्वास्थ्य की बढ़ती लागत के कारण मध्यम वर्ग अब आवास बाजार से बाहर होता जा रहा है, जिससे असुरक्षा की भावना और गहरी हो गई है।

विशेषता पारंपरिक रोजगार प्रिकेरियट (गिग वर्क)
अनुबंध का प्रकार स्थायी/दीर्घकालिक अस्थायी/शून्य-घंटा
आय स्थिरता निश्चित मासिक वेतन परिवर्तनीय/कार्य-आधारित
लाभ/सुविधाएं पेंशन, स्वास्थ्य बीमा कोई नहीं/स्व-वित्तपोषित
सामाजिक स्थिति स्थिर मध्यम वर्ग आर्थिक रूप से असुरक्षित

इस संकट को हल करने के लिए केवल एआई कोचिंग या ऑनलाइन प्रमाणपत्र पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए स्वास्थ्य और आवास जैसी सार्वजनिक वस्तुओं का व्यापक विस्तार और आर्थिक गतिविधियों का वास्तविक विकेंद्रीकरण आवश्यक है ताकि स्थानीय स्तर पर सार्थक रोजगार पैदा हो सकें।

क्या आप जानते हैं?: 'टैंग पिंग' (लेटे रहना) शब्द चीन में '996' कार्य संस्कृति (सुबह 9 से रात 9, सप्ताह में 6 दिन) के खिलाफ एक मौन विरोध के रूप में शुरू हुआ था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: युवा रोजगार के संदर्भ में NEET का क्या अर्थ है?
NEET का अर्थ है 'Not in Education, Employment, or Training' (न शिक्षा, न रोजगार, न प्रशिक्षण), जो उन व्यक्तियों को संदर्भित करता है जो वर्तमान में इनमें से किसी भी मार्ग पर नहीं हैं।

प्रश्न 2: 'प्रिकेरियट' पारंपरिक श्रमिक वर्ग से कैसे अलग है?
पारंपरिक श्रमिक वर्ग के विपरीत, प्रिकेरियट के पास नौकरी की सुरक्षा, अनुमानित आय और व्यावसायिक पहचान की कमी होती है, और वे निरंतर आर्थिक अस्थिरता में जीते हैं।