केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतिशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखित पत्र में पालक्कड़ रेलवे डिवीजन से मंगलूरु को हटाने के प्रस्ताव को रोकने का अनुरोध किया, क्योंकि इससे उत्तरी केरल की रेल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास पर बड़ा असर पड़ेगा।
- मंगलूरु को पालक्कड़ से अलग करने का प्रस्ताव
- इससे पालक्कड़ डिवीजन की आय में 90% तक घटाव
- केरल सरकार ने केंद्र को पुनर्विचार करने का अनुरोध किया
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतिशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर रेल बोर्ड के उस निर्णय को रोकने का आग्रह किया, जिसमें मंगलूरु क्षेत्र (उलाल तक) को पालक्कड़ रेलवे डिवीजन से दक्षिणपश्चिम रेलवे के मयसुरु डिवीजन में स्थानांतरित करने की योजना है। यह परिवर्तन 1 अक्टूबर से लागू होने का प्रस्ताव है।
सतिशी जी ने बताया कि यह निर्णय केरल सरकार से परामर्श किए बिना लिया गया था, जबकि यह उत्तर केरल के रेल बुनियादी ढाँचे और विकास पर गहरा असर डालता है। मंगलूरु सेंट्रल, जंक्शन और पोर्ट से जुड़े प्रमुख रेल सुविधाएँ, जैसे पनम्बुर कंटेनर‑हैंडलिंग सेंटर, इस बदलाव में शामिल हैं।
डिवीजन के राजस्व पर असर स्पष्ट है: मंगलूरु क्षेत्र पालक्कड़ डिवीजन के कुल माल राजस्व का 90% से अधिक (लगभग ₹650 करोड़) और कुल राजस्व का आधे से अधिक (₹1,650 करोड़) का स्रोत है। इस क्षेत्र को हटाने से डिवीजन की वित्तीय नींव कमजोर हो जाएगी, जिससे माल ढुलाई, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और यात्रियों की सुविधाओं पर दबाव पड़ेगा।
सतिशी ने यह भी याद दिलाया कि 2007 में सलैम डिवीजन के गठन के बाद पालक्कड़ डिवीजन ने पहले ही कोयम्बटूर क्षेत्र खो दिया था। मंगलूरु का स्थानांतरण इस डिवीजन के अधिकार क्षेत्र और आय आधार को और घटाएगा।
रेलवे डिवीजन केवल प्रशासनिक इकाई नहीं होते; इनके सीमाओं का सीधा असर कनेक्टिविटी, निवेश, माल प्रवाह और यात्रियों की सेवा पर पड़ता है। इसलिए डिवीजन के पुनर्गठन का निर्णय सभी हितधारकों की सहमति से होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि रेलवे मंत्रालय को इस निर्णय को पुनः विचार करने का निर्देश दें, केरल सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से परामर्श करके पालक्कड़ डिवीजन की मौजूदा अधिकार सीमा को बरकरार रखें और उत्तरी केरल में निवेश व सेवाओं को बढ़ावा दें।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय रेलवे ने 1951 में पहली बार डिवीजन बनाकर नेटवर्क को प्रबंधनीय बनाया। 2007 में सलैम डिवीजन के गठन से पालक्कड़ डिवीजन का क्षेत्रफल घटा, जिससे उसकी आय में उल्लेखनीय कमी आई। इस बार मंगलूरु का स्थानांतरण संभावित रूप से वही प्रभाव दोहराएगा, परंतु इस बार आर्थिक दायरे में अधिक बड़ा नुकसान होगा।
| डिवीजन | राजस्व हिस्सा | मुख्य सुविधाएँ |
|---|---|---|
| पालक्कड़ (प्रस्ताव से पहले) | 90%+ | मंगलूरु सेंट्रल, जंक्शन, पनम्बुर पोर्ट |
| पालक्कड़ (प्रस्ताव के बाद) | ≈10% | शेष स्टेशन |
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that weakening the Palakkad division could trigger a cascade of budget cuts across the Malabar region, slowing down critical infrastructure projects and affecting thousands of daily commuters and freight operators.
"मंगलूरु का हटना पालक्कड़ डिवीजन की वित्तीय स्थिरता को गंभीर खतरे में डालता है," रेल विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या इस निर्णय को रद्द करने की प्रक्रिया में संसद की भूमिका होगी?
उत्तर: निर्णय को पुनः विचार करने के लिए रेलवे मंत्रालय को केरल सरकार और संबंधित स्टेट्स के साथ परामर्श करना आवश्यक होगा; संसद की सीधी भागीदारी नहीं है, परन्तु बजट अनुमोदन पर प्रभाव पड़ सकता है।
प्रश्न 2: यदि बदलाव लागू हो गया तो माल ढुलाई दरों पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: पालक्कड़ डिवीजन की आय घटने से संभावित रूप से माल ढुलाई शुल्क में वृद्धि हो सकती है, जिससे उद्योगों को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ेगा।