ड्राविडियन वैधता (DMK) के नेता एमके स्टालिन ने कोलथुर विधानसभा सीट पर हार के बाद मदरास हाई कोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की पूरी जाँच और 100% वीवीपीएटी काउंट की मांग की है। उन्होंने मतगणना में तकनीकी गड़बड़ियों, सीसीटीवी फुटेज के संरक्षण और 18 तकनीकी स्पष्टीकरणों के जवाब न मिलने को प्रमुख मुद्दे बताया है।

  • स्टालिन ने 286 में से केवल 14 ईवीएम की जाँच मांगी
  • पाँच मतदान केंद्रों में वीवीपीएटी फेल, जिससे 8,795 वोट का अंतर
  • कोर्ट से 100% वीवीपीएटी काउंट और सभी रिकॉर्ड का संरक्षण अनुरोधित

ड्राविडियन वैधता (DMK) के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व तमिलनाडु मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मदरास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें वह कोलथुर विधानसभा सीट पर अपने 8,795 वोट की हार को चुनौती देते हुए सभी 286 ईवीएम की 100% वीवीपीएटी काउंट की मांग कर रहे हैं।

याचिका की मुख्य मांगें

स्टालिन ने कोर्ट को अनुरोध किया है कि वह सीसीटीवी फुटेज, कस्टडी रजिस्टर, तकनीकी रिपोर्ट और अन्य सभी संबंधित दस्तावेज़ों को संरक्षित करे, साथ ही 5 अगस्त को जारी किए गए प्रमाणपत्र को निरस्त करे, जो उनके प्रतिद्वंद्वी वी.एस. बाबू को दिया गया था। उन्होंने सभी 286 मशीनों की जाँच‑पड़ताल की भी माँग की है।

तकनीकी त्रुटियों का विवरण

याचिका में बताया गया है कि मतदान केंद्र 28 में वीवीपीएटी ने 12 वोटों के बाद "Error 2.7" दिखाया, जबकि केंद्र 75 में भी समान विफलता दर्ज हुई। केंद्र 157 में बैलेट और कंट्रोल यूनिट के कैरिंग केस में खाली एड्रेस टैग पाए गए, और केंद्र 79 में सीरियल नंबर मेल नहीं खाए। सबसे गंभीर मामला केंद्र 208 का था, जहाँ स्टालिन के नाम वाले बैलेट यूनिट को कंट्रोल यूनिट ने पहचान नहीं किया, फिर भी जिला चुनाव अधिकारी ने उसी दिन जाँच को सफल बताया।

सांख्यिकीय विश्लेषण

स्टालिन ने यह भी तर्क दिया है कि जहाँ त्रुटियाँ दर्ज हुईं (5 केंद्र), वहाँ उनका वोट‑शेयर 29.87% था, जबकि बाकी 281 केंद्रों में 40.74% था। प्रतिद्वंद्वी बाबू का शेयर उलटा था – 55.97% बनाम 45.08%। यह असंगति दर्शाती है कि यदि जाँच पूरी नहीं हुई तो वास्तविक मत‑परिणाम का पता लगाना असंभव है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that इस प्रकार की अदालत‑पर्यंत की चुनौती भारतीय चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और भरोसे को सीधे प्रभावित करती है, विशेषकर जब मुख्य प्रतिद्वंद्वी एक प्रमुख राज्य के मुख्यमंत्री हों।

"इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की पूरी जाँच‑पड़ताल के बिना किसी भी चुनावी परिणाम की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है," कहा चुनाव विशेषज्ञ डॉ. अनीता राव ने।
Did You Know?: कोलथुर में 2011 से लगातार डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव एलायंस (DMK) ने इस सीट को जीतते हुए दो दशकों से अधिक समय तक सत्ता में रही है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या अदालत स्टालिन की याचिका को स्वीकार कर सकती है?

उत्तर: अदालत प्रक्रिया, प्रस्तुत तकनीकी प्रमाण और मौजूदा चुनावी नियमों के आधार पर निर्णय लेगी।

प्रश्न 2: यदि 100% वीवीपीएटी काउंट किया गया तो परिणाम बदल सकता है?

उत्तर: संभावित रूप से, क्योंकि पंजीकृत त्रुटियों वाले पाँच केंद्रों में मतों का अंतर महत्वपूर्ण है।