वियरेबल तकनीक के तेज़ विकास के साथ स्मार्ट ग्लासेज़ व्यक्तिगत गोपनीयता को नई चुनौती दे रहे हैं। भारत में मौजूदा डेटा‑सुरक्षा कानूनी ढाँचा इन नवाचारों को नियंत्रित करने में असमर्थ दिख रहा है।
- Meta की AI‑संचालित स्मार्ट ग्लासेज़ में छिपे कैमरा और माइक्रोफ़ोन सार्वजनिक निगरानी को आसान बनाते हैं।
- वर्तमान भारतीय डेटा‑प्रोटेक्शन कानून (DPDPA) तकनीकी‑विशिष्ट नियमों की कमी के कारण इन डिवाइसों को काबू नहीं कर पाते।
- महिला और बच्चों की सुरक्षा पर संभावित खतरों को देखते हुए तत्काल नियामक सुधार आवश्यक है।
स्मार्ट ग्लासेज़ का उदय
जून में रियलिटी स्टार Kylie Jenner ने Meta के AI‑संचालित स्मार्ट ग्लासेज़ की नई डिज़ाइन को प्रमोट किया, जिससे सोशल मीडिया पर तीव्र चर्चा छिड़ गई। ये चश्मे आवाज़ कमांड, कॉल, मैसेज और नोटिफिकेशन को संभालते हैं, साथ ही एकीकृत कैमरा और छोटे स्पीकर भी होते हैं। Meta का दावा है कि यह ‘सामान्य दिखने वाले चश्मे’ में अत्याधुनिक तकनीक को बेताब तरीके से छिपा कर पेश किया गया है।
गोपनीयता एवं डेटा से जुड़ी चिंताएँ
भारत में इन चश्मों की कीमत लगभग ₹25,000 है, और कई विक्रेता LED रिकॉर्डिंग इंडिकेटर को ढँकने वाले स्टिकर भी बेचते हैं। हालांकि, स्टिकर हटाने पर रिकॉर्डिंग तुरंत पुनः शुरू हो जाती है, और शटर साउंड भी स्पष्ट संकेत नहीं देता। Meta का कहना है कि यह डिवाइस ‘उपयोगकर्ता द्वारा नियंत्रित’ है, लेकिन यह नियंत्रण केवल पहनने वाले तक सीमित है, रिकॉर्ड किए जा रहे व्यक्ति को नहीं।
वास्तविक जीवन में संभावित जोखिम
स्वीडिश समाचारपत्रों Svenska Dagbladet और Goteborgs-Posten की जांच में पाया गया कि Meta के ठेकेदार कभी‑कभी ऐसे संवेदनशील फुटेज देखते हैं, जिसमें उपयोगकर्ता टॉयलेट जैसी निजी जगहों में होते हैं। NCRB के आंकड़ों के अनुसार 2023 में भारत में महिला‑केन्द्रित साइबरक्राइम के 3,678 मामलों में से 2,767 में यौन स्पष्ट सामग्री का प्रसारण या प्रकाशन शामिल था। इसी तरह, 698 से अधिक बाल यौन शोषण मामलों की रिपोर्ट भी उपलब्ध है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत ने 2017 के K.S. Puttaswamy vs. Union of India फैसले के बाद निजता को मौलिक अधिकार (धारा 21) के तहत मान्यता दी। परंतु 2023 का Digital Personal Data Protection Act (DPDPA) तकनीकी‑अज्ञेय है और सार्वजनिक स्थानों में रिकॉर्डिंग को नियंत्रित नहीं करता, जिससे ‘रिज़ोनेबल एक्सपेक्टेशन ऑफ प्राइवेसी’ का सिद्धांत कमजोर पड़ता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that without clear statutory guidelines, wearable AI devices like smart glasses could become tools for mass surveillance, eroding trust in digital ecosystems and amplifying gender‑based privacy violations.
“स्मार्ट ग्लासेज़ के बिना नियामक नियंत्रण के, व्यक्तिगत डेटा का अनधिकृत संग्रह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम बन सकता है।”
Frequently Asked Questions
स्मार्ट ग्लासेज़ को सार्वजनिक जगहों में पहनना कानूनी है क्या? वर्तमान में भारत में कोई विशेष कानून नहीं है, परंतु DPDPA के तहत डेटा संग्रह की सीमाएँ लागू हो सकती हैं।
क्या इन चश्मों के लिए कोई गोपनीयता संकेतक अनिवार्य है? नहीं, लेकिन Meta ने LED इंडिकेटर का उल्लेख किया है, जिसे कवर करने वाले स्टिकर बाजार में उपलब्ध हैं।