कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने जाति जनगणना के लिए प्रस्तावित प्रश्नावली को 'भ्रामक' बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा पद्धति को बदलने की मांग की है।

  • कांग्रेस नेताओं ने मौजूदा जाति जनगणना प्रश्नावली को 'भ्रामक' करार दिया है।
  • मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने पीएम मोदी को संयुक्त पत्र लिखकर बदलाव की मांग की।
  • नेताओं ने सुझाव दिया कि एससी/एसटी की तरह जातियों की एक 'ड्रॉप-डाउन सूची' का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • गलत डेटा से पिछड़ी जातियों के सामाजिक न्याय और आरक्षण के लाभ प्रभावित हो सकते हैं।

भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेताओं, मल्लिकार्जुन खड़गे (राज्यसभा) और राहुल गांधी (लोकसभा) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा आगामी जाति जनगणना के लिए तैयार की गई प्रश्नावली की कड़ी आलोचना की है और इसे पूरी तरह से बदलने की मांग की है।

कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि सरकार ने जाति विवरण दर्ज करने के लिए 'ओपन-एंडेड' (मुक्त-अंत) प्रश्न प्रारूप अपनाया है, जो बेहद भ्रामक हो सकता है। खड़गे और गांधी ने चेतावनी दी कि यदि व्यक्ति अपनी जाति का नाम स्वयं दर्ज करता है, तो एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उप-जातियों या भाषाई विविधताओं के कारण हजारों टुकड़ों में बंट सकती है। इससे प्राप्त होने वाला डेटा पूरी तरह से निरर्थक हो जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल डेटा संग्रह का नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के सामाजिक न्याय और राजनीतिक शक्ति संतुलन का है। यदि जनगणना में जातियों का सही संख्यात्मक विवरण नहीं मिलता है, तो शिक्षा, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं के लिए आरक्षण का आधार ही कमजोर पड़ जाएगा।

'सटीक डेटा के बिना सामाजिक न्याय की नीतियां केवल कागजी बनकर रह जाएंगी, जो हाशिए पर मौजूद समुदायों के साथ अन्याय होगा।'

विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार के प्रयासों को महज एक 'वाइटवॉश' (सफेदी) करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का तीसरा पत्र है जो प्रधानमंत्री को भेजा गया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

कांग्रेस ने समाधान के रूप में तेलंगाना (2024) और बिहार (2022) के जाति सर्वेक्षणों का उदाहरण दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को मौजूदा सरकारी रिकॉर्ड और 'एन्थ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया' का उपयोग करके जातियों की एक पूर्व-निर्धारित 'ड्रॉप-डाउन सूची' बनानी चाहिए, जैसा कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए किया जाता है।

Did You Know?: भारत में एक ही जाति को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग उप-जातियों या नामों से जाना जा सकता है, जो डेटा संग्रह को चुनौतीपूर्ण बनाता है।

Frequently Asked Questions

1. कांग्रेस ने प्रश्नावली को भ्रामक क्यों कहा है?
क्योंकि ओपन-एंडेड प्रश्नों के कारण एक ही जाति के नाम अलग-अलग हो सकते हैं, जिससे सही जनसंख्या का पता लगाना असंभव हो जाएगा।

2. विपक्ष ने क्या समाधान सुझाया है?
विपक्ष ने एससी/एसटी की तरह जातियों की एक ड्रॉप-डाउन सूची बनाने का सुझाव दिया है ताकि डेटा मानकीकृत रहे।