प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. सी.एन.आर. राव को कोई भौतिक नोटिस नहीं दिए जाने के आधिकारिक दावों के बावजूद, कर्नाटक मुख्य चुनाव अधिकारी के सार्वजनिक रिकॉर्ड में उनका नाम अभी भी 'नोटिस श्रेणी' में बना हुआ है।

  • 'स्व-नाम बेमेल' (self-name mismatch) के कारण प्रो. सी.एन.आर. राव का नाम चुनावी नोटिस सूची में आया।
  • अधिकारियों का दावा है कि कोई भौतिक नोटिस नहीं दिया गया और उनके कद को देखते हुए नाम सीधे अंतिम सूची में जोड़ दिया गया।
  • विरोधाभास यह है कि कर्नाटक CEO की सार्वजनिक सूची में अभी भी उनका नाम 'नोटिस' श्रेणी में है।

भारत रत्न सम्मानित और विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. सी.एन.आर. राव के नाम को लेकर एक गंभीर प्रशासनिक विसंगति सामने आई है। यह विवाद कर्नाटक में चुनावी नामावलियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान शुरू हुआ, जहाँ प्रोफेसर के नाम में 'स्व-नाम बेमेल' पाया गया था।

बीबीएमपी उत्तर जिले के अतिरिक्त जिला चुनाव अधिकारी (ADEO) पोम्मला सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि विसंगति पाए जाने पर सिस्टम द्वारा नोटिस तो जेनरेट हुआ, लेकिन प्रो. राव को भौतिक रूप से कोई नोटिस नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक के योगदान और कद को देखते हुए, बीएलओ (BLO) ने उनके मामले को सीधे अंतिम मंजूरी के लिए एईआरओ (AERO) को अनुशंसित किया, जिसने 8 सितंबर, 2026 को अंतिम सूची में नाम जोड़ने की मंजूरी दे दी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि जमीनी स्तर के प्रशासनिक निर्णयों और मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) की डिजिटल पारदर्शिता के बीच एक बड़ा अंतर है। जब अधिकारी 'वीआईपी' के लिए मानक प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हैं—जैसे नोटिस न देना या निवास पर सुनवाई करना—तो यह एक दोहरे मानक वाली प्रणाली बनाता है जिसे कानूनी रूप से चुनौती दी जा सकती है। यह तथ्य कि सार्वजनिक सूची अभी भी 'नोटिस' स्थिति दिखा रही है, चुनाव मशीनरी के भीतर डेटा सिंक्रोनाइज़ेशन की विफलता को दर्शाता है।

प्रशासनिक छूटों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड का तालमेल न होना चुनावी संशोधन प्रक्रिया की अखंडता पर सवाल उठाता है।

समस्या और तब बढ़ गई जब मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने इस बारे में कोई स्पष्ट संचार नहीं किया कि प्रतिष्ठित व्यक्तियों के नामों को नोटिस सूची से हटाकर सीधे अंतिम सूची में कैसे जोड़ा जाएगा। हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रो. राव को कोई भौतिक नोटिस नहीं मिला, लेकिन सिस्टम में मौजूद रिकॉर्ड अभी भी सार्वजनिक है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

एडीईओ ने प्रोफेसर के निवास पर दिए गए एक गणना फॉर्म (enumeration form) की तस्वीरें साझा कर अपनी बात सही साबित करने की कोशिश की। हालांकि, जानकारों का कहना है कि गणना फॉर्म एक प्रारंभिक प्रक्रिया है; नोटिस एक अलग कानूनी आवश्यकता है जो केवल ड्राफ्ट रोल के प्रकाशन के बाद विसंगति पाए जाने पर जारी की जाती है।

क्या आप जानते हैं?: विशेष गहन संशोधन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने, डुप्लिकेट हटाने और त्रुटियों को सुधारने के लिए उपयोग की जाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: प्रो. सी.एन.आर. राव का नाम पहली बार सूची में क्यों आया?
चुनावी नामावलियों की SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम में 'स्व-नाम बेमेल' (self-name mismatch) पाया गया था।

प्रश्न 2: क्या आधिकारिक रिकॉर्ड में इस गलती को सुधार लिया गया है?
अधिकारियों का दावा है कि उन्हें अंतिम सूची में शामिल कर लिया गया है, लेकिन बुधवार शाम तक कर्नाटक CEO की सार्वजनिक सूची में उनका नाम अभी भी नोटिस श्रेणी में था।