आंध्र प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष च. अय्यन्ना पात्रुडू ने वाईएसआरसीपी सरकार पर पिछड़ा वर्ग की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि टीडीपी सरकार ने आरक्षण बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाया है।
- टीडीपी ने पूर्व वाईएसआरसीपी सरकार पर विशिष्ट समुदायों को लाभ पहुँचाने और बीसी (BC) की अनदेखी का आरोप लगाया।
- स्थानीय निकायों में बीसी आरक्षण को 24% से बढ़ाकर 34% किया गया है।
- विधानसभा अध्यक्ष च. अय्यन्ना पात्रुडू ने एनटी रामाराव के योगदान को याद करते हुए बीसी एकता का आह्वान किया।
आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले के नरसिपटनम में आयोजित 'जयहो बीसी' कार्यक्रम के दौरान तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेताओं ने पूर्ववर्ती वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने जानबूझकर पिछड़े वर्गों (BC) की उपेक्षा की और केवल कुछ चुनिंदा समुदायों को लाभ पहुँचाया। उन्होंने बीसी समुदाय से एकजुट होकर आगामी चुनावों में वाईएसआरसीपी को हराने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष च. अय्यन्ना पात्रुडू ने कहा कि टीडीपी सरकार ने पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने विशेष रूप से स्थानीय निकायों में आरक्षण को 24% से बढ़ाकर 34% करने के निर्णय पर जोर दिया, जिससे जमीनी स्तर पर बीसी समुदाय का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।
ऐतिहासिक संदर्भ और एनटी रामाराव की विरासत
श्री पात्रुडू ने राजनीति में एन.टी. रामाराव (NTR) के प्रवेश से पहले के दौर को याद किया, जब विशाखापत्तनम क्षेत्र में केवल कुछ प्रभावशाली समुदायों का वर्चस्व था। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि 1983 के विधानसभा चुनावों के दौरान, उनके पास वित्तीय संसाधनों की कमी थी और परिवार के सदस्यों ने भी उन्हें चुनाव लड़ने से मना किया था। हालांकि, एनटीआर के प्रोत्साहन और जनता के समर्थन से वह जीत हासिल करने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि एनटीआर ने ही राज्य भर में बीसी नेताओं की पहचान की और उन्हें राजनीति में मुख्यधारा में लाया।
प्रतिनिधित्व में वृद्धि का प्रभाव
आंकड़ों का हवाला देते हुए पात्रुडू ने बताया कि बीसी समुदाय में 137 जातियां शामिल हैं, जो कुल मतदाता आधार का लगभग 57% हैं। आरक्षण में 10% की वृद्धि से स्थानीय प्रशासन में व्यापक बदलाव आएगा।
| पद (Position) | 24% आरक्षण (पूर्व) | 34% आरक्षण (वर्तमान) |
|---|---|---|
| बीसी सरपंच | ~13,350 | 32,000 - 45,000 |
| मंडल अध्यक्ष | 158 | 224 |
| MPTC सदस्य | 2,411 | 3,416 |
| जिला परिषद अध्यक्ष | 7 | 34 |
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह राजनीतिक दांव सीधे तौर पर आंध्र प्रदेश के सबसे बड़े वोट बैंक, बीसी समुदाय को लक्षित करता है। आरक्षण में वृद्धि केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक कदम है ताकि स्थानीय स्तर पर टीडीपी की पकड़ मजबूत हो और वाईएसआरसीपी के सामाजिक गठबंधन को चुनौती दी जा सके।
"आरक्षण में वृद्धि से न केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, बल्कि बीसी समुदायों के लिए बजट आवंटन और कल्याणकारी योजनाओं के अवसरों में भी भारी वृद्धि होगी।"
इसके अलावा, पात्रुडू ने वाईएसआरसीपी अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी को विधानसभा में आकर इन मुद्दों पर बहस करने की चुनौती दी। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि वाईएसआरसीपी ने जिला चयन समिति (DSC) के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती के खिलाफ अदालतों का दरवाजा खटखटाया, जो बेरोजगार युवाओं की आकांक्षाओं के विरुद्ध है।
Frequently Asked Questions
1. टीडीपी ने बीसी आरक्षण को कितना बढ़ाया है?
टीडीपी सरकार ने स्थानीय निकायों में बीसी आरक्षण को 24% से बढ़ाकर 34% कर दिया है।
2. च. अय्यन्ना पात्रुडू ने वाईएसआरसीपी पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने बीसी समुदाय की उपेक्षा की और केवल कुछ विशिष्ट समुदायों को लाभ पहुँचाया।