कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान (Prorogation) में अभूतपूर्व देरी करने का आरोप लगाया है। जयराम रमेश ने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह परिसीमन विधेयक के लिए 'दागी' दो-तिहाई बहुमत जुटाने की साजिश रच रहे हैं।
- संसद के सत्रावसान में 29 दिनों की रिकॉर्ड देरी, जिसने 2015 के 28 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
- कांग्रेस का आरोप है कि गृह मंत्री अमित शाह परिसीमन विधेयक पास कराने के लिए 'सुपर-टेंटेड' दो-तिहाई बहुमत की तलाश में हैं।
- विपक्ष ने परिसीमन प्रस्तावों पर सर्वसम्मति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार ने संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान (prorogation) में देरी करने का एक नया और शर्मनाक रिकॉर्ड कायम किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि संसद के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और इसके सत्रावसान के बीच का अंतर अब 29 दिन हो गया है, जो कि लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।
रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया कि यह देरी 2015 के मानसून सत्र के 28 दिनों के रिकॉर्ड को भी पार कर गई है। उन्होंने तर्क दिया कि सामान्यतः यह अंतराल केवल तीन से चार दिनों का होता है। कांग्रेस का मानना है कि सरकार जानबूझकर सत्रावसान में देरी कर रही है ताकि वह पर्दे के पीछे अपनी राजनीतिक गणनाएं पूरी कर सके।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह विवाद केवल प्रशासनिक देरी का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे—परिसीमन (Delimitation)—से जुड़ा है। यदि सरकार बिना व्यापक सहमति के परिसीमन विधेयक पारित करती है, तो यह क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संघीय ढांचे के संतुलन को स्थायी रूप से बदल सकता है।
कांग्रेस ने विशेष रूप से गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में मिली करारी हार का बदला लेना चाहते हैं। उस दिन परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था। रमेश ने आरोप लगाया कि शाह अब धमकी, प्रलोभन और दबाव के माध्यम से उन दलों में फूट डाल रहे हैं जिन्होंने पहले विधेयक का विरोध किया था।
संसद के सत्रावसान में इस तरह की असामान्य देरी यह संकेत देती है कि सत्तापक्ष विधायी प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक इंजीनियरिंग को प्राथमिकता दे रहा है।
कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया कि वह परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने से क्यों कतरा रही है। विपक्षी दलों की मांग है कि देश के भविष्य और गणतंत्र की बुनियादी बातों को प्रभावित करने वाले इस विषय पर पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए, न कि इसे रहस्य और गोपनीयता के घेरे में रखा जाए।
| विवरण | 2015 मानसून सत्र | 2026 मानसून सत्र |
|---|---|---|
| स्थगन और सत्रावसान के बीच अंतर | 28 दिन | 29 दिन (और जारी) |
| स्थिति | पिछला रिकॉर्ड | नया रिकॉर्ड |
Frequently Asked Questions
1. परिसीमन विधेयक क्या है?
यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने से संबंधित है, जो अक्सर जनसंख्या के आधार पर होता है।
2. 17 अप्रैल, 2026 को क्या हुआ था?
उस दिन परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में 352 आवश्यक वोटों के बजाय केवल 298 वोट मिले, जिससे वह गिर गया।