भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि मानसून सत्र के औपचारिक समापन (प्रोरोगेशन) में जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि परिसीमन विधेयक के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाया जा सके।
- कांग्रेस का आरोप है कि 'अनिश्चित काल' के स्थगन और औपचारिक समापन के बीच 29 दिनों का रिकॉर्ड अंतराल हुआ है।
- आरोप है कि गृह मंत्री अमित शाह परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के लिए 'दागी' बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
- 17 अप्रैल, 2026 को परिसीमन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा था।
नई दिल्ली में राजनीतिक माहौल गरमा गया है क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र के औपचारिक समापन (प्रोरोगेशन) में हुई अभूतपूर्व देरी को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि सदन को 'अनिश्चित काल' (sine die) के लिए स्थगित तो कर दिया गया, लेकिन राष्ट्रपति द्वारा सत्र के औपचारिक समापन तक यह कानूनी रूप से खुला रहता है, और इसी तकनीकी पहलू का राजनीतिक लाभ उठाया जा रहा है।
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि स्थगन और प्रोरोगेशन के बीच का अंतर 29 दिनों तक पहुंच गया है—जो 2015 में बने 28 दिनों के रिकॉर्ड को तोड़ देता है। सामान्य तौर पर, यह प्रक्रिया केवल तीन से चार दिनों में पूरी हो जाती है। रमेश ने सवाल उठाया कि भारतीय गणतंत्र के बुनियादी ढांचे से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर इतनी "गोपनीयता और रहस्य" क्यों रखा जा रहा है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह तकनीकी देरी केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि रणनीतिक है। सत्र को तकनीकी रूप से खुला रखकर सरकार एक तरह की विधायी अनिश्चितता की स्थिति बनाए हुए है। विवाद का मुख्य केंद्र परिसीमन विधेयक है, जो लोकसभा और विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने के लिए आवश्यक है, लेकिन इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। 17 अप्रैल, 2026 को इस विधेयक की विफलता सरकार के लिए एक बड़ा झटका थी।
प्रोरोगेशन में देरी का उपयोग विपक्ष को मानसिक रूप से अस्थिर करने और सत्ता पक्ष द्वारा बिखरते समर्थन को एकजुट करने के एक मनोवैज्ञानिक हथियार के रूप में किया जा रहा है।
जयराम रमेश ने आगे आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह "धमकी, डराने-धमकाने और प्रलोभनों" का उपयोग करके उन दलों के रुख को बदलने की कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने पहले विधेयक के खिलाफ मतदान किया था। उन्होंने दावा किया कि तीन दलों में पहले ही फूट डाल दी गई है ताकि एक "सुपर-दागी" बहुमत तैयार किया जा सके।
ऐतिहासिक रूप से, परिसीमन—यानी निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण—भारत में सबसे संवेदनशील राजनीतिक प्रक्रियाओं में से एक रहा है, क्योंकि यह विभिन्न भाषाई और क्षेत्रीय समूहों के प्रतिनिधित्व को सीधे प्रभावित करता है। वर्तमान गतिरोध लोकसभा के भीतर सीटों के पुनर्वितरण को लेकर गहरे ध्रुवीकरण को दर्शाता है।
| पैरामीटर | 2015 मानसून सत्र | 2026 मानसून सत्र |
|---|---|---|
| स्थगन से प्रोरोगेशन का अंतराल | 28 दिन | 29+ दिन |
| मानक प्रक्रिया | 3-4 दिन | 3-4 दिन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: अनिश्चित काल के स्थगन और प्रोरोगेशन में क्या अंतर है?
अनिश्चित काल का स्थगन सदन की एक विशिष्ट बैठक को समाप्त करता है, जबकि प्रोरोगेशन राष्ट्रपति द्वारा किया गया वह औपचारिक कार्य है जो पूरे सत्र को समाप्त करता है।
प्रश्न 2: परिसीमन विधेयक को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता क्यों है?
क्योंकि इसमें संविधान संशोधन शामिल है, इसलिए इसे साधारण बहुमत के बजाय विशेष बहुमत (उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई) की आवश्यकता होती है।