केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पारित कराने के लिए नवरात्रि के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। BRICS शिखर सम्मेलन के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है।
- सरकार नवरात्रि के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है।
- मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को पारित कराना है।
- BRICS समिट के बाद सत्र की तारीखों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
- कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सत्रावसान में देरी को लेकर सरकार की आलोचना की है।
नई दिल्ली में राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल जैसे महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को पूरा करने के लिए नवरात्रि के दौरान संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। गौरतलब है कि मानसून सत्र का सत्रावसान (prorogation) अभी तक नहीं किया गया है, जिससे यह संभावना और प्रबल हो गई है कि सरकार सदन को पुनः सक्रिय कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार वर्तमान में BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियों और उसकी मेजबानी पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के संपन्न होने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि विशेष सत्र की आवश्यकता है या नहीं। यदि सरकार सत्र बुलाने का निर्णय लेती है, तो इसे नवरात्रि के शुभ अवसर पर आयोजित किया जा सकता है, अन्यथा मानसून सत्र का औपचारिक रूप से सत्रावसान कर दिया जाएगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, महिला आरक्षण बिल न केवल एक राजनीतिक कदम है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र में लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है। परिसीमन बिल के साथ इसका जुड़ाव यह दर्शाता है कि सरकार चुनावी प्रतिनिधित्व के ढांचे को पूरी तरह से पुनर्गठित करने की तैयारी में है। यह कदम आगामी चुनावों से पहले सरकार की छवि को 'महिला-केंद्रित' बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
संसदीय प्रक्रियाओं में सत्रावसान में देरी अक्सर सरकार द्वारा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण विधेयकों को बिना किसी नए सत्र की औपचारिक घोषणा के पेश करने के लिए किया जाता है।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस देरी पर कड़े सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि मानसून सत्र के समापन और सत्रावसान के बीच 29 दिनों का अंतर आ गया है, जो कि 2015 के रिकॉर्ड (28 दिन) को तोड़ रहा है। उन्होंने इसे सरकार की 'बेवकूफी' करार दिया और कहा कि विपक्ष इस रणनीति से घबराने वाला नहीं है।
संसदीय उत्पादकता के आंकड़ों पर नजर डालें तो मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहा। लोकसभा में निर्धारित समय के मुकाबले बहुत कम काम हो सका, जिससे कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित रह गए। इसी वजह से अब विशेष सत्र की मांग और संभावना दोनों बढ़ गई हैं।
| सदन | अपेक्षित कार्य समय (घंटे) | वास्तविक कार्य समय |
|---|---|---|
| लोकसभा | 90 घंटे | 15 घंटे 36 मिनट |
| राज्यसभा | 90 घंटे | 24 घंटे 21 मिनट |
Frequently Asked Questions
1. विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
विशेष सत्र का प्राथमिक उद्देश्य महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को पारित कराना है।
2. जयराम रमेश ने सरकार की आलोचना क्यों की?
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मानसून सत्र के बाद सत्रावसान करने में असामान्य देरी की है, जो संसदीय परंपराओं के विपरीत है।