तृणमूल कांग्रेस ने बांग्लादेशी संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की दुखद स्थिति पर भारतीय जनता पार्टी की चुप्पी को लेकर तीखा हमला बोला है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि सत्ता के समीकरण बदलने के बाद बीजेपी ने संत के संघर्ष को नजरअंदाज कर दिया है।

  • टीएमसी ने बांग्लादेशी संत चिन्मय दास की दुर्दशा पर बीजेपी की चुप्पी की आलोचना की।
  • कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने सत्ता में आने के बाद संत के मुद्दे को भुला दिया है।
  • संत चिन्मय दास को अपनी मृत मां के अंतिम संस्कार के लिए संक्षिप्त पैरोल दी गई थी।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बांग्लादेशी संत चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की जेल में दयनीय स्थिति और उनकी मां के निधन के बाद के हृदयविदारक दृश्यों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा है। टीएमसी का आरोप है कि जो बीजेपी कभी संत की रिहाई के लिए सड़कों पर थी, वह अब सत्ता की चकाचौंध में मौन हो गई है।

टीएमसी प्रवक्ता और विधायक कुणाल घोष ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि संत चिन्मय दास की अपनी मां के पार्थिव शरीर के पास विलाप करने की तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं। घोष ने सवाल उठाया कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और राज्य में बीजेपी नेतृत्व क्या कर रहा है? उन्होंने याद दिलाया कि जब बीजेपी विपक्ष में थी, तब उसने कोलकाता में बांग्लादेशी डिप्टी हाई कमीशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किए थे।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this is not just a humanitarian issue but a strategic political move by the TMC to paint the BJP as an 'opportunistic' party. By linking the plight of a minority religious figure in Bangladesh to the BJP's current silence, the TMC is attempting to erode the BJP's core narrative of protecting Hindus globally, especially ahead of regional political shifts in West Bengal.

"The intersection of cross-border religious persecution and domestic political rivalry often turns humanitarian crises into electoral ammunition."

संत चिन्मय दास, जो ISKCON से जुड़े हैं, पिछले काफी समय से बांग्लादेश की जेलों में बंद हैं। हाल ही में उन्हें चट्टोग्राम के हथाज़ारी में पुंडरीक धाम में अपनी मां संध्या रानी धर के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए केवल पांच घंटे की संक्षिप्त पैरोल दी गई। दो साल की लंबी कानूनी लड़ाई और हिरासत के बीच अपनी मां को खोना उनके लिए एक गहरा आघात था।

ऐतिहासिक रूप से, बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति हमेशा से भारत के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रही है। भारतीय राजनीतिक दल अक्सर इस मुद्दे का उपयोग अपनी विचारधारा को पुख्ता करने के लिए करते हैं। हालांकि, टीएमसी ने स्पष्ट किया कि यह एक विदेशी देश का आंतरिक मामला है, लेकिन मानवीय आधार पर और बीजेपी के दोहरे मापदंडों को उजागर करने के लिए उन्होंने यह मुद्दा उठाया है।

क्या आप जानते हैं?: चिन्मय कृष्ण दास प्रभु बांग्लादेश में ISKCON के एक प्रमुख पुजारी हैं और लंबे समय से वहां के हिंदू समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: चिन्मय दास कौन हैं और वे जेल में क्यों हैं?
उत्तर: चिन्मय दास बांग्लादेश के एक हिंदू संत और ISKCON पुजारी हैं, जिन्हें बांग्लादेशी सरकार ने विभिन्न कानूनी मामलों में हिरासत में लिया है।

प्रश्न 2: टीएमसी ने बीजेपी पर क्या आरोप लगाया है?
उत्तर: टीएमसी का आरोप है कि बीजेपी ने सत्ता में आने के बाद संत चिन्मय दास की रिहाई के मुद्दे को पूरी तरह भुला दिया है, जबकि पहले वे इसके लिए विरोध प्रदर्शन करते थे।