केंद्र सरकार द्वारा 2029 तक 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की योजना ने एनडीए गठबंधन के भीतर दरार पैदा कर दी है। बिहार के प्रमुख सहयोगी दलों ने मसौदे को सार्वजनिक करने और विस्तृत परामर्श की मांग की है।

  • केंद्र सरकार 2029 तक 21 NDA राज्यों में UCC लागू करना चाहती है।
  • JD(U) और LJP(RV) ने मसौदे को सार्वजनिक करने और बातचीत की मांग की है।
  • UCC के प्रावधानों में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण शामिल है।
  • अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है।

केंद्र सरकार की समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की महत्वाकांक्षी योजना ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर आंतरिक खींचतान शुरू कर दी है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक गठबंधन शासित 21 राज्यों में इस कानून को लागू करना है, लेकिन इस कदम ने बिहार के महत्वपूर्ण सहयोगियों, जनता दल (यूनाइटेड) और लोजपा (रामविलास) को चिंता में डाल दिया है।

बिहार के इन प्रमुख सहयोगियों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी जल्दबाजी का विरोध करेंगे। दलों का तर्क है कि कानून का मसौदा सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि सभी समुदायों की चिंताओं को समझा जा सके। उनका कहना है कि किसी भी समुदाय को इस प्रक्रिया में उपेक्षित या आहत महसूस नहीं होना चाहिए। वहीं, बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी सरकार पर दबाव बनाते हुए मांग की है कि गठबंधन के सभी घटक दल अपनी स्थिति स्पष्ट करें।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि UCC केवल एक कानूनी सुधार नहीं है, बल्कि यह एक गहरा राजनीतिक मुद्दा है जो सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करता है। यदि गठबंधन के भीतर असहमति बढ़ती है, तो यह आगामी चुनावों में एनडीए की एकजुटता के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

UCC का कार्यान्वयन भारत के जटिल सामाजिक ढांचे में एक अत्यंत संवेदनशील राजनीतिक कदम है।

प्रस्तावित UCC ढांचे के प्रमुख प्रावधानों में बहुविवाह (Polygamy) पर पूर्ण प्रतिबंध, विवाह की एक समान आयु सीमा, लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण और लिंग-आधारित संपत्ति अधिकारों में समानता शामिल है। हालांकि, एक महत्वपूर्ण राहत यह है कि अनुसूचित जनजातियों (ST) को फिलहाल इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में व्यक्तिगत कानून (Personal Laws) धार्मिक मान्यताओं पर आधारित रहे हैं। UCC का विचार संविधान के अनुच्छेद 44 का हिस्सा है, जो राज्य को पूरे देश में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का निर्देश देता है। दशकों से यह बहस का विषय रहा है कि क्या यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है या राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक है।

Did You Know?: भारत में वर्तमान में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग विवाह और उत्तराधिकार कानून लागू हैं, जो UCC के लागू होने पर समाप्त हो जाएंगे।

Frequently Asked Questions

1. क्या UCC सभी समुदायों पर लागू होगा?
प्रस्तावित मसौदे के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों को इससे छूट दी गई है, लेकिन अन्य समुदायों के लिए समान कानून लागू होंगे।

2. JD(U) की मुख्य मांग क्या है?
JD(U) चाहता है कि सरकार कानून का मसौदा सार्वजनिक करे और सभी हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा करे।