कोयंबटूर के प्रसिद्ध मरुधमलाई मंदिर प्रशासन ने प्रस्तावित 184 फुट ऊंची भगवान मुरुगन की मूर्ति के लिए एक पर्यावरण के अनुकूल स्थान खोजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मद्रास उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
- प्रस्तावित मूर्ति की ऊंचाई 184 फुट होगी और अनुमानित लागत ₹110 करोड़ है।
- मद्रास उच्च न्यायालय ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
- प्रशासन अब पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल स्थान की तलाश कर रहा है।
कोयंबटूर के प्रसिद्ध मरुधमलाई सुब्रमण्यस्वामी मंदिर के प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भगवान मुरुगन की प्रस्तावित 184 फुट ऊंची विशाल मूर्ति के लिए एक पर्यावरण के अनुकूल स्थान की पहचान करने की संभावनाओं पर विचार करना शुरू कर दिया है। यह निर्णय मद्रास उच्च न्यायालय में दायर एक रिट याचिका के जवाब में आया है, जिसमें इस विशाल संरचना के निर्माण को चुनौती दी गई है।
हालिया सुनवाई के दौरान, मंदिर प्रशासन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि अधिकारी मूर्ति की स्थापना के लिए एक ऐसे स्थान की तलाश कर रहे हैं जो पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान न पहुंचाए। अदालत ने मंदिर प्रशासन को इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर, 2026 के लिए निर्धारित की है। अदालत ने तब तक यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया है।
परियोजना का विवरण और लागत
मंदिर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि प्रस्तावित मूर्ति को मरुधमलाई की तलहटी में मुंडन परिसर (tonsuring complex) के पास बनाने की योजना थी। इस परियोजना के लिए पंचायत और राज्य राजमार्ग विभाग से लगभग 2.5 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी। इस भव्य मूर्ति के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग ₹110 करोड़ है, जिसे दानदाताओं के योगदान से पूरा करने का प्रस्ताव है।
पर्यावरण संबंधी चिंताएं और कानूनी जांच
मरुधमलाई का क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील वन क्षेत्र है। प्रस्तावित मूर्ति के निर्माण से स्थानीय पर्यावरण और वन्यजीवों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर व्यापक चिंताएं जताई गई हैं। इसी कारण से, अदालत द्वारा नियुक्त एक एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) ने पिछले वर्ष प्रस्तावित स्थल का दौरा किया था ताकि वहां की पर्यावरणीय स्थितियों का आकलन किया जा सके।
विशाल धार्मिक संरचनाओं और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आधुनिक भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच बढ़ते संघर्ष का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रशासन अब यह तय करने की कोशिश कर रहा है कि क्या मूल स्थान को बदला जाए या मौजूदा स्थान को ही पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाए।
Frequently Asked Questions
1. मरुधमलाई मूर्ति परियोजना की कुल लागत क्या है?
इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹110 करोड़ है, जो दान के माध्यम से जुटाई जाएगी।
2. अदालत ने इस मामले में क्या आदेश दिया है?
अदालत ने मंदिर प्रशासन को विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा है।