एक नई उपग्रह मिशन, जो गोल्फ बॉल और डिस्को बॉल का मिश्रण है, ने पृथ्वी के फ्रेम‑ड्रैग प्रभाव को 0.2% की सटीकता से मापा। यह परिणाम जेनरल रिलेटिविटी के लेंस‑थ्रिंग प्रभाव के सबसे सटीक मान को स्थापित करता है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • पृथ्वी के फ्रेम‑ड्रैग को 0.2% त्रुटि तक मापा गया।
  • नया उपग्रह लेंस‑थ्रिंग परीक्षण में पिछले मिशनों से पाँच गुना बेहतर है।
  • परिणाम आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत की मजबूती को पुनः पुष्ट करता है।

विज्ञान की नवीनतम उपलब्धि ने एक अनोखे उपग्रह के माध्यम से सामान्य सापेक्षता के सबसे कठिन परीक्षणों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह उपग्रह, जिसे अक्सर “डिस्को बॉल” कहा जाता है क्योंकि इसका आकार गोल्फ बॉल जैसा और सतह पर चमकीला प्रतिबिंबन है, ने पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न फ्रेम‑ड्रैग या लेंस‑थ्रिंग प्रभाव को अभूतपूर्व शुद्धता के साथ मापा।

पृष्ठभूमि और सिद्धांत

आइंस्टीन के जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी के अनुसार, कोई भी घूर्णनशील वस्तु—जैसे पृथ्वी—स्पेस‑टाइम के ताने‑बाने को अपनी धुरी के चारों ओर खींचती है। इस घटना को “फ्रेम‑ड्रैग” या “लेंस‑थ्रिंग प्रभाव” कहा जाता है, जिसका नाम 1918 में इस प्रभाव को गणितीय रूप से वर्णित करने वाले भौतिक विज्ञानी जोसेफ लेंस और हेल्मुर्ट थ्रिंग से आया है। बड़े द्रव्यमान और तेज़ घूर्णन वाले वस्तुओं, जैसे ब्लैक होल, में यह प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से देखा गया है।

पहले के परीक्षण

पिछले दो दशकों में, NASA के ग्रैविटी प्रोब ए (Gravity Probe B) और इटली‑अमेरिका‑जर्मनी के LAGEOS उपग्रहों ने पृथ्वी के लेंस‑थ्रिंग प्रभाव को 1‑2% की सीमा तक मापा था। हालांकि ये माप अत्यधिक जटिल और महंगे थे, फिर भी वे सापेक्षता सिद्धांत की वैधता को समर्थन देते थे। नई खोज का महत्व इस बात में है कि यह त्रुटि को 0.2% तक घटा देती है, जिससे संभावित वैकल्पिक सिद्धांतों के परीक्षण का दायरा काफी बढ़ता है।

डिस्को बॉल मिशन की तकनीक

इस परियोजना की अगुवाई इग्नाज़ियो चियुफ़ोलिनी ने की, जो चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ फिज़िक्स एंड मैथमेटिक्स में कार्यरत हैं। उपग्रह को विशेष रूप से उच्च प्रतिबिंबक सतह और सटीक लेज़र रेंजिंग उपकरणों से सुसज्जित किया गया, जिससे पृथ्वी के केंद्र से उसकी दूरी को मिलीसेकंड स्तर की सटीकता से मापा जा सकता है। इन डेटा को कई वर्षों तक एकत्र कर, वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न सूक्ष्म स्पेस‑टाइम परिवर्तन को गणितीय मॉडल के साथ मिलाया।

भविष्य के प्रभाव और संभावनाएँ

यह उपलब्धि न केवल आइंस्टीन के सिद्धांत की पुष्टि करती है, बल्कि भविष्य में अधिक सूक्ष्म ग्रैविटेशनल प्रयोगों के लिए एक मंच स्थापित करती है। यदि लेंस‑थ्रिंग प्रभाव को और भी कम त्रुटि के साथ मापा जा सके, तो यह डार्क मैटर, डार्क एनर्जी या क्वांटम ग्रैविटी जैसे रहस्यमयी क्षेत्रों में नई अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकता है। वैज्ञानिक अब इस तकनीक को अन्य ग्रहों और संभवतः चंद्रमा के आसपास लागू करने की योजना बना रहे हैं।