कलबुर्गी में शरणा मार्ग चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार लिंगन्ना सत्यमपेटे को उनकी निर्भीक पत्रकारिता और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण के लिए श्रद्धांजलि दी गई।

मुख्य बातें

  • लेखक लिंगन्ना सत्यमपेटे की 14वीं पुण्यतिथि पर कलबुर्गी में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
  • सत्यमपेटे को भ्रष्टाचार और किसानों की समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक निर्भीक विचारक के रूप में याद किया गया।
  • बे बेंगलुरु CCB अधिकारी बी.एस. सुधाकर को 'बसवा मार्ग पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
  • संतोष सत्यमपेटे द्वारा लिखित पुस्तक 'अप्पाना ओदनता' का विमोचन किया गया।

कलबुर्गी: शरणा लेखक, शिक्षक और पत्रकार लिंगन्ना सत्यमपेटे को शनिवार को कलबुर्गी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में एक निडर विचारक और समझौताहीन लेखक के रूप में याद किया गया। उन्होंने अपने जीवनकाल में भ्रष्टाचार, राजनीतिक कदाचार और किसानों की कठिन परिस्थितियों को बेबाकी से उजागर किया था।

शरणा मार्ग चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में, सेवाओं के सम्मान में बेंगलुरु सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) के अधिकारी बी.एस. सुधाकर को राज्य स्तरीय 'बसवा मार्ग पुरस्कार' प्रदान किया गया। इस अवसर पर संतोष सत्यमपेटे द्वारा लिखित पुस्तक 'अप्पाना ओदनता' का भी विमोचन किया गया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सत्यमपेटे जैसे पत्रकारों का योगदान लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उन्होंने न केवल समाचार लिखे, बल्कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों को जवाबदेह ठहराया, जो आज के दौर में एक दुर्लभ गुण है।

सत्यमपेटे एक ऐसे शिक्षक थे जिन्होंने 'लंकेश पत्रिका' में राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखकर अपनी नौकरी और प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दिया।

पूर्व मंत्री एस.के. कांता ने स्मृति ताज़ा करते हुए कहा कि सत्यमपेटे ने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया, भले ही उन्हें बार-बार तबादलों और निलंबन का सामना करना पड़ा। उन्होंने वर्तमान सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए और पूछा कि जब किसानों को पर्याप्त सहायता नहीं मिल रही, तो बड़े उद्योगपतियों को भारी सब्सिडी क्यों दी जा रही है?

सत्यमपेटे के पुत्र विश्वराध्य सत्यमपेटे ने अपने पिता के समर्पण को याद करते हुए बताया कि उनके द्वारा स्थापित 'बसवा मार्ग' समाचार पत्र का प्रसार कभी 25,000 प्रतियों तक पहुँच गया था। उन्होंने कभी लाभ-हानि की चिंता नहीं की, बल्कि ज्ञान के प्रसार को सर्वोपरि रखा।

क्या आप जानते हैं?: लिंगन्ना सत्यमपेटे केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि बसवन्ना के दर्शन के प्रबल अनुयायी भी थे, जिन्होंने पूरे कर्नाटक में सामाजिक समानता का संदेश फैलाया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: लिंगन्ना सत्यमपेटे को किस बात के लिए जाना जाता है?
उत्तर: उन्हें भ्रष्टाचार और राजनीतिक अनियमितताओं को उजागर करने वाले एक निडर पत्रकार और शिक्षक के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 2: बसवा मार्ग पुरस्कार किसे दिया गया?
उत्तर: इस वर्ष यह पुरस्कार बेंगलुरु CCB अधिकारी बी.एस. सुधाकर को उनकी सेवाओं के लिए दिया गया।