भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में सैटेलाइट लॉन्च की नई दहलीज़ खुल गई है। स्कायरूट एयरोस्पेस ने शनिवार को मिशन आगमन के तहत विक्रम‑1 को स्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया, जिससे देश का पहला निजी कक्षा‑रॉकेट अंतरिक्ष में पहुंचा। यह historic मिशन तकनीकी प्रयोग और कला को एक साथ लेकर आया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- विक्रम‑1 का सफल प्रक्षेपण भारतीय निजी अंतरिक्ष को नई दिशा देगा
- 350 किग्रा तक के पेलोड को 450 किमी LEO में स्थापित करने की क्षमता
- कार्बन‑कम्पोजिट संरचना से रॉकेट का वजन और लागत दोनों में कमी
स्कायरूट एयरोस्पेस, हैदराबाद‑आधारित स्पेस‑टेक स्टार्ट‑अप, भारत का पहला निजी कक्षा‑रॉकेट विक्रम‑1 को स्रीहरिकोटा के पहले लॉन्च पैड से 11:30 एएम पर भेजने के लिए तैयार है। यह मिशन, जिसका नाम “मिशन आगमन” रखा गया है, केवल तकनीकी परीक्षण नहीं, बल्कि कला के साथ अंतरिक्ष में पहला प्रयोग भी है, जिसमें 18 किलोग्राम सोने की माइक्रो‑आर्ट शामिल है।
पृष्ठभूमि और विकास
2022 में स्कायरूट ने भारत का पहला निजी सबऑर्बिटल रॉकेट विक्रम‑एस को 89.5 किमी की ऊँचाई तक पहुंचाया। उस सफलता के बाद कंपनी ने पूरी तरह से कार्बन‑कम्पोजिट संरचना वाला विक्रम‑1 विकसित किया, जो तीन ठोस‑इंधन स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल से सुसज्जित है। कार्बन फाइबर का उपयोग रॉकेट को पारंपरिक स्टील‑आधारित डिज़ाइन की तुलना में पाँच गुना हल्का बनाता है, जिससे इंधन दक्षता बढ़ती है।
मिशन के उद्देश्य
विक्रम‑1 अधिकतम 350 किग्रा पेलोड को 450 किमी की लो‑अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 60‑डिग्री इन्क्लिनेशन के साथ स्थापित करेगा। पेलोड में ग्रहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डी‑क्यूब्ड और स्कायरूट की अपनी SCOPE तकनीकी डेमोंस्ट्रेशन शामिल हैं। साथ ही, कॉसमॉस डायमंड्स की कला “कोस्मिक ब्लूम” और सर सी वी रमन, डॉ विक्रम साराभाई एवं डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम की माइक्रो‑शिल्पों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, जो भारतीय विज्ञान एवं कला के मिश्रण को दर्शाता है।
वर्तमान स्थिति और भविष्य की दृष्टि
विक्रम‑1 को लॉन्च पैड पर इंटीग्रेट किया जा चुका है और सभी अंतिम जांचें, जैसे टेलीमेट्री ग्राउंड स्टेशन एवं ट्रैकिंग रडार इंटरफ़ेस, पूरी हो चुकी हैं। संस्थापक एवं सीईओ पवन कुमार चंदन ने कहा, “यह पहला टेस्ट फ़्लाइट है, जिससे हमें मूल्यवान डेटा मिलेगा। यह वह पहला रॉकेट है जो पूरी तरह कार्बन‑कम्पोजिट से बना है।” इस सफलता से भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने की राह पर अग्रसर किया जाएगा, जिससे सस्ते और विश्वसनीय लॉन्च सेवाएँ उपलब्ध होंगी।