कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हेब्बल झील पर प्रस्तावित टनल रोड परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि 24 अगस्त तक जवाब नहीं दिया गया, तो परियोजना पर रोक लगाई जा सकती है।
मुख्य बिंदु
- कर्नाटक हाईकोर्ट ने हेब्बल झील पर टनल प्रोजेक्ट के प्रभाव पर सरकार से जवाब मांगा है।
- 24 अगस्त तक जवाब न देने पर प्रोजेक्ट पर रोक लगाने की चेतावनी दी गई है।
- याचिका में झील के बफर जोन को कम करने वाले नए कानूनों को चुनौती दी गई है।
- प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹1,130 करोड़ है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गुरुवार को हेब्बल झील के पास प्रस्तावित 2.2 किलोमीटर लंबे तीन-लेन टनल रोड प्रोजेक्ट के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना हेब्बल जंक्शन से कर्नाटक पशु चिकित्सा, पशुपालन और मत्स्य विश्वविद्यालय (KVAFSU) तक बनाई जानी है, जिसकी अनुमानित लागत ₹1,130 करोड़ है।
अदालत की सख्त चेतावनी
मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरु और न्यायमूर्ति के.एस. हेमलेखा की खंडपीठ ने सरकार को स्पष्ट रूप से मौखिक रूप से चेतावनी दी है कि यदि प्राधिकरणों ने 24 अगस्त की अगली सुनवाई से पहले लिखित में जवाब दाखिल नहीं किया, तो अदालत इस परियोजना पर रोक लगा सकती है। अदालत ने विशेष रूप से पूछा है कि क्या परियोजना के हेब्बल झील पर पड़ने वाले प्रभावों पर कोई वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है।
बफर जोन और कानूनी विवाद
याचिकाकर्ताओं—जिनमें तकनीकी विशेषज्ञ गुरुप्रसाद आर.के. और हेब्बल नेचर सोसाइटी की संस्थापक एलिजाबेथ सौम्या शामिल हैं—का तर्क है कि यह परियोजना पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हेब्बल झील के लिए एक गंभीर खतरा है। याचिका में कर्नाटक टैंक संरक्षण और विकास प्राधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है, जो झीलों के आसपास के बफर जोन को काफी कम कर देता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बढ़ते संघर्ष का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यदि टनल झील के जल प्रवाह (inflow/outflow) में बाधा डालती है, तो इससे बेंगलुरु के जल स्तर और बाढ़ की स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि बफर जोन में कटौती शहरी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है।
Frequently Asked Questions
1. कोर्ट ने सरकार को क्या निर्देश दिया है?
कोर्ट ने सरकार से यह हलफनामा मांगा है कि क्या टनल प्रोजेक्ट के कारण झील के पानी के आने-जाने के रास्ते में कोई बाधा आएगी।
2. याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग क्या है?
याचिकाकर्ता चाहते हैं कि विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र टीम द्वारा हाइड्रोलॉजिकल और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किया जाए।